Tuesday, September 29, 2026
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Mahakal Bhasma Aarti : महाकाल की भस्म आरती में गूंजा उज्जैन, भक्तों का उमड़ा सैलाब

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निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।

पंचामृत अभिषेक से शुरुआत

भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का विधिवत पंचामृत अभिषेक किया गया। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से स्नान कराकर भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। इस दौरान मंदिर में रुद्रपाठ, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

भस्म श्रृंगार का आध्यात्मिक महत्व

अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष भस्म श्रृंगार किया गया, जो इस मंदिर की प्रमुख परंपराओं में से एक है। सनातन धर्म में भस्म को वैराग्य और जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक माना जाता है। यह अनुष्ठान भक्तों को यह संदेश देता है कि सांसारिक मोह-माया अस्थायी है और ईश्वर भक्ति ही स्थायी सत्य है।

भक्ति में लीन दिखे श्रद्धालु

भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालु भजन-कीर्तन, मंत्र-जप और ध्यान में लीन होकर इस दिव्य क्षण का अनुभव करते नजर आए। कई भक्तों का मानना है कि महाकाल की भस्म आरती के दर्शन से मन को शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु

महाकालेश्वर मंदिर में इस विशेष आरती के दर्शन के लिए न केवल देश बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचे। यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और वैश्विक आस्था का केंद्र माना जाता है।

आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

उज्जैन का महाकाल मंदिर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक विरासत को भी दर्शाती है।

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