CEC appointment controversy : नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद से कांग्रेस ने चुनाव आयोग को चुनाव सुधार के लिए एक भी सुझाव नहीं भेजा, लेकिन अब प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल खड़े कर रही है। शाह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ और ‘चुनाव चोरी’ के आरोप निराधार हैं।
CEC appointment controversy : शाह ने विपक्ष के नेता द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश में 73 वर्षों तक मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कोई कानून ही नहीं था। उन्होंने कहा, “1950 से 1989 तक चुनाव आयोग एक सदस्यीय था, और प्रधानमंत्री सीधे फाइल राष्ट्रपति को भेजते थे, और वह अप्रूव हो जाती थी।” शाह ने दावा किया कि अब तक जितने भी चुनाव आयुक्त या मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, वे सभी इसी प्रकार से नियुक्त हुए। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि जब पिछले 55 साल तक प्रधानमंत्री ही CEC को नियुक्त करते रहे, तब कोई सवाल क्यों नहीं उठाया गया, जबकि अब मोदी सरकार पर अनावश्यक आरोप लगाए जा रहे हैं।
CEC appointment controversy : गृह मंत्री ने मौजूदा प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने तो CEC के चुनाव के लिए पैनल को बहुसदस्यीय बनाया है, जिसमें विपक्ष को भी जगह दी गई है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी ने तो पुरानी परंपरा बनाई थी, जहाँ 100% अधिकार प्रधानमंत्री के पास था। शाह ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2023 में एक मुकदमे के बाद कोर्ट ने सुझाव दिया था कि जब तक कानून नहीं बनता, तब तक CEC की अध्यक्षता में एक समिति बने, जिसमें प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हों।
CEC appointment controversy : विपक्ष के इस आरोप पर कि उनकी बात समिति में सिर्फ 33 फीसदी होती है, शाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जनता तय करती है कि 66 फीसदी कौन होगा। आप (विपक्ष) जीतिए और आप भी 66 फीसदी में जगह बनाइए।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के आरोप निराधार हैं, क्योंकि कांग्रेस के समय में तो विपक्ष को नियुक्ति में शून्य प्रतिशत की जगह मिलती थी, जबकि हमने उन्हें जगह दी। शाह ने यहाँ तक कहा कि विपक्ष के नेता का भाषण तैयार करने वाले लोग शायद पर्याप्त रिसर्च नहीं करते हैं।
उन्होंने 2012 के आडवाणी के पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें CEC नियुक्ति के लिए एक प्रणाली बनाने की मांग की गई थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। शाह के इन बयानों से स्पष्ट है कि सरकार CEC नियुक्ति की वर्तमान प्रक्रिया को पारदर्शी और सुधारवादी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे ‘कार्यकारी वर्चस्व’ के रूप में देख रहा है।













