नई दिल्ली : कर्नाटक की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है। सत्ता के शीर्ष पद पर संभावित बदलाव की अटकलों के बीच शनिवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेंगलुरु में नाश्ते की बैठक की। पार्टी हाईकमान के संकेत पर आयोजित इस मुलाकात को प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से चल रही नेतृत्व की खींचतान को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक के बाद सिद्धारमैया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि उनके और शिवकुमार के बीच किसी भी तरह का मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारे बीच अच्छी बातचीत हुई। भविष्य में भी हमारे बीच कोई विवाद नहीं होगा। यह मुलाकात सिर्फ कन्फ्यूजन दूर करने के लिए की गई थी। हमने 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा की है।”
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#WATCH | Karnataka Deputy CM DK Shivakumar meets Chief Minister Siddaramaiah at the latter’s residence in Bengaluru
CM Siddaramaiah has invited him for breakfast today.
Legal advisor to CM AS Ponnanna is also present.
(Source: CMO) pic.twitter.com/TGJSxFTtSA
— ANI (@ANI) November 29, 2025
सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी के भीतर हर फैसला हाईकमान करेगा और राज्य नेतृत्व उसी दिशा में कार्य करेगा। उन्होंने दावा किया कि विधायकों में असंतोष जैसी कोई बात नहीं है, बल्कि सभी नेता पार्टी के निर्णयों के साथ हैं।
दिल्ली में हुए पुराने ‘वादे’ की याद दिला सकते हैं शिवकुमार
सूत्रों के अनुसार, नाश्ते की बैठक के दौरान शिवकुमार ने सिद्धारमैया को मई 2023 में सरकार गठन के समय हुए कथित ‘समझौते’ की याद दिलाई। माना जाता है कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल का पावर-शेयरिंग फॉर्मूला तय हुआ था। इसी समझौते के तहत सिद्धारमैया पहले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बने थे और बाकी कार्यकाल में शिवकुमार को पद सौंपे जाने की बात कही गई थी।
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20 नवंबर को सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद से ही यह मुद्दा फिर सक्रिय हो गया है। शिवकुमार समर्थक लगातार उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। ऐसे में इस बैठक के बाद शिवकुमार का दिल्ली जाने का फैसला भी राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
क्या नेतृत्व बदलाव संभव?
कर्नाटक कांग्रेस के भीतर असल चुनौती हाईकमान के फैसले को संतुलित तरीके से लागू करना है। सिद्धारमैया सरकार अभी भी लोकप्रिय कार्यक्रमों पर काम कर रही है, वहीं शिवकुमार की अपनी मजबूत पकड़ और संगठनात्मक क्षमता उन्हें सीधे मुकाबले में खड़ा करती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाईकमान तत्काल कोई बड़ा निर्णय नहीं लेगा, लेकिन सियासी परदे के पीछे गहन मंथन जारी है। पार्टी नहीं चाहती कि सत्ता संघर्ष की छवि बने, खासकर 2028 के चुनाव को देखते हुए।
अब सबकी नजर दिल्ली पर
नाश्ते की बैठक के बाद जहां सिद्धारमैया ने एकजुटता का संदेश दिया, वहीं शिवकुमार के दिल्ली जाने की तैयारी संकेत देती है कि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। आने वाले दिनों में हाईकमान की ओर से लिए जाने वाले फैसले से यह तय होगा कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन होगा या नहीं।











