पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस बार उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पार्टी के सात प्रमुख नेताओं ने सामूहिक इस्तीफा देकर नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इस्तीफा देने वाले नेताओं ने खुलकर आरोप लगाया है कि पार्टी में परिवारवाद और मनमानी हद से ज्यादा बढ़ चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान RLM को एनडीए गठबंधन में छह सीटें मिली थीं। इनमें से चार सीटों पर जीत हासिल हुई। उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता ने भी सासाराम से जीत दर्ज की थी। राजनीतिक गलियारों में यह कयास था कि एनडीए सरकार में स्नेहलता को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन इसके विपरीत उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद देकर सभी को चौंका दिया।
पार्टी के अंदर भारी असंतोष
इसी के विरोध में पार्टी के सात वरिष्ठ नेताओं ने इस्तीफा दे दिया, जिनमें बिहार प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ, राज्य महासचिव एवं प्रवक्ता राहुल कुमार, राज्य महासचिव राजेश रंजन सिंह, जमुई प्रभारी बिपिन कुमार चौरसिया, लखीसराय प्रभारी प्रमोद यादव और शेखपुरा जिला अध्यक्ष पप्पू मंडल शामिल हैं।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा ने समाजवादी सिद्धांतों को दरकिनार करते हुए खुलकर “वंशवाद” को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा, “मैं नौ साल से पार्टी में हूँ, लेकिन अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चित हूँ। यह निर्णय वंशवाद का क्लासिक उदाहरण है।”प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा ने भी कहा कि उपेंद्र कुशवाहा नैतिकता की बात तो करते हैं, लेकिन असल फैसला आते ही उन्होंने परिवार को तरजीह दे दी।
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इस्तीफों के बाद RLM में उथल-पुथल बढ़ गई है और पार्टी की स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है। चूंकि यह राजनीतिक घटनाक्रम नई सरकार गठन के तुरंत बाद हुआ है, इसलिए इसका NDA की स्थिरता और समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।











