US Supreme Court : नई दिल्ली। अमेरिकी संघीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहली बार पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए मनमाने आयात शुल्क (‘टैरिफ-टैरर’) की वैधता पर अंतिम फैसला होने जा रहा है। यह मामला न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ट्रिलियन-डॉलर का प्रभाव डाल सकता है, बल्कि यह भी निर्धारित करेगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास विदेशी व्यापार नीति को एकतरफा निर्धारित करने की कितनी असीमित कार्यकारी शक्ति (Executive Power) है। निचली अदालतों ने पहले ही यह निर्णय दिया है कि ट्रंप को आपातकालीन कानून के तहत शुल्क निर्धारित करने और बदलने की असीमित शक्ति नहीं है।
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ट्रंप प्रशासन का मुख्य तर्क यह है कि टैरिफ उनकी विदेश नीति के दृष्टिकोण का प्रमुख हिस्सा हैं, और अदालतों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में राष्ट्रपति के निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करना चाहिए। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए चेतावनी दी है कि यदि राष्ट्रपति जल्दी और कुशलता से टैरिफ की शक्ति का उपयोग नहीं कर सकता, तो देश असुरक्षित हो जाएगा, जो “हमारे राष्ट्र के विनाश की ओर ले जा सकता है”। इस प्रकार, रिपब्लिकन प्रशासन ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रहे इन टैरिफ का बचाव करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
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दूसरी ओर, ट्रंप के इस फैसले को चुनौती देने वाले विरोधियों का कहना है कि टैरिफ का आर्थिक प्रभाव अत्यधिक होगा और यह अगले दशक में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर लगभग तीन ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। विरोधी समूह (जिनमें कई व्यवसाय शामिल हैं) का तर्क है कि अमेरिकी संविधान स्पष्ट रूप से टैरिफ लगाने की शक्ति कांग्रेस को देता है, और ट्रंप ने आयात करों को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन कानूनों का गलत उपयोग किया है।
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सुप्रीम कोर्ट के रूढ़िवादी बहुमत ने व्हाइट हाउस में ट्रंप की वापसी के बाद उनकी सीमाओं को चुनौती देने वाली नीतियों को अस्थायी रूप से लागू करने की अनुमति दी है। हालांकि, न्यायाधीश पहली बार यह विचार करेंगे कि क्या ट्रंप को स्थायी रूप से टैरिफ लगाने की असीमित शक्ति को ‘ना’ कहा जाए। इस फैसले से साफ होगा कि व्यापारिक नीतियों पर राष्ट्रपति की शक्ति कितनी व्यापक है, या क्या कांग्रेस की संवैधानिक शक्ति इस पर अंकुश लगाएगी।
यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो यह उनकी “अमेरिका फर्स्ट” आर्थिक नीति को मजबूत करेगा और राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों में भारी वृद्धि होगी। इसके विपरीत, यदि अदालत उनके खिलाफ फैसला सुनाती है, तो ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका लगेगा, और उन्हें कई आयात शुल्कों को वापस लेना पड़ सकता है, जिसका वैश्विक व्यापार और उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर होगा। यह सुनवाई अमेरिका के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में से एक बन गई है।











