नई दिल्ली| डिजिटल इंडिया अभियान के साथ देशभर में ऑनलाइन भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मोबाइल वॉलेट, UPI, नेटबैंकिंग और डेबिट/क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार तकनीकी खराबी या नेटवर्क समस्या के कारण पेमेंट कट तो जाता है, लेकिन सामने वाले तक पहुंच नहीं पाता। ऐसे मामलों में लोग घबरा जाते हैं और समझ नहीं पाते कि पैसा वापस कैसे आएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेमेंट फंसने की स्थिति में सबसे पहले ट्रांज़ैक्शन आईडी, तारीख, समय और भुगतान की राशि को नोट करें। अगर संभव हो तो उस लेन-देन का स्क्रीनशॉट भी लें। इसके बाद तुरंत उस ऐप या बैंक की कस्टमर केयर से संपर्क करें, जिसके माध्यम से भुगतान किया गया था। अधिकतर ऐप्स में ‘Help’ या ‘Support’ सेक्शन होता है, जहां से शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
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अगर बैंक या ऐप द्वारा 7 से 10 दिनों में समाधान नहीं मिलता, तो ग्राहक को अगला कदम उठाना चाहिए। बैंक के नोडल अधिकारी को ईमेल भेजकर शिकायत को ‘एस्केलेट’ किया जा सकता है। फिर भी समाधान न मिले तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के बैंकिंग लोकपाल (ombudsman) के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
इस साल आयकर रिफंड, कस्टम ड्यूटी और ऑनलाइन शॉपिंग पेमेंट से जुड़े हजारों मामले ऐसे सामने आए हैं, जहां ग्राहक का पैसा फंसा रह गया। आयकर विभाग ने हाल ही में स्वीकार किया कि करीब 35 लाख मामलों में रिफंड बैंक खाते के वेरिफिकेशन के कारण रुका हुआ है। वहीं, कस्टम विभाग ने भी ICEGATE पोर्टल पर फेल हुए पेमेंट्स के लिए नई रिफंड गाइडलाइन जारी की है।
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पुलिस विभाग और साइबर सेल भी यह सलाह देते हैं कि अगर किसी को फ्रॉड का शक हो — जैसे कि ग़लत अकाउंट में पैसा चला गया हो या किसी अज्ञात लिंक से पेमेंट कट गया हो — तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें और नज़दीकी थाने में शिकायत करें।
डिजिटल पेमेंट सुरक्षित और तेज़ होते हैं, लेकिन तकनीकी गड़बड़ियों से पूरी तरह मुक्त नहीं। इसलिए ग्राहक को सतर्क रहना चाहिए और हर लेन-देन का रिकॉर्ड रखना चाहिए। समय पर उचित कदम उठाने से आपका पैसा सुरक्षित रूप से वापस मिल सकता है।











