Thursday, September 24, 2026
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नान घोटाले पर हाईकोर्ट का आखिरी वार, CBI जांच की मांग खारिज, अब ट्रायल कोर्ट में खुलेगा बचे हुए मगरमच्छों का राज

नान घोटाले पर हाईकोर्ट
नान घोटाले पर हाईकोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने के बहुचर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले की से जांच कराने की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को निराकृत (निपटा) कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस पी.पी. साहू की विशेष खंडपीठ ने यह कहते हुए जांच एजेंसी बदलने की मांग को अस्वीकार कर दिया कि मामला साल से अधिक पुराना है और विचारण (ट्रायल) अंतिम चरण में है।

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कोर्ट के इस निर्णय का महत्वपूर्ण निहितार्थ यह है कि अब याचिकाकर्ताओं के पास उन लोगों के खिलाफ विचारण न्यायालय (ट्रायल कोर्ट) में धारा के तहत आवेदन लगाने का रास्ता खुल गया है, जिनकी घोटाले में सीधी भूमिका होने के बावजूद ने चालान पेश नहीं किया है। इसके साथ ही, भाजपा नेता धरमलाल कौशिक को जांच के खिलाफ लगाई गई अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति भी मिल गई।

सुप्रीम कोर्ट से रोक हटने के बाद हुई सुनवाई

नान घोटाले से संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण करीब साल से इन पर सुनवाई नहीं हो पा रही थी। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट से संबंधित मामलों का निराकरण होने के बाद आज हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने इन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान केवल ‘हमर संगवारी’ और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव की तरफ से ही वकील उपस्थित रहे। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अतुल झा ने कोर्ट को बताया कि सालों में में से गवाहों की गवाही हो चुकी है और मामला अब अंतिम चरण की ओर है।

एसीबी ने कई बड़े लोगों को छोड़ा”

अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने अपनी दलील में की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिनका चालान हुआ है, उस पर उन्हें आपत्ति नहीं, बल्कि उनका समर्थन है। उनकी मुख्य मांग है कि ने अपनी जांच में बहुत सारे लोगों को छोड़ दिया है और सीधी भूमिका होने के बावजूद उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जहरीले नमक सप्लाई करने वाले अभियुक्त मुनीश कुमार शाह की अब तक गिरफ्तारी तक नहीं हुई है, जिससे की जांच आधी-अधूरी लगती है।

इस पर खंडपीठ ने कहा कि जांच एजेंसी बदलने की मांग अब उचित नहीं लगती और यह मांग तो विचरण न्यायालय में धारा का आवेदन लगाकर भी पूरी की जा सकती है। यह कहते हुए खंडपीठ ने सभी जनहित याचिकाओं को निराकृत/खारिज कर दिया।

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नान घोटाला: क्या है पूरा मामला?

नान घोटाला छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली () में हुई बड़े पैमाने की गड़बड़ी से संबंधित है।

  • आरोप: नागरिक आपूर्ति निगम (नान) पर लाख राशन कार्ड बनाकर हजारों करोड़ रुपये का राशन गायब करने का आरोप लगा था, जबकि जनसंख्या के अनुसार लाख परिवार थे।
  • घटिया सप्लाई: की चार्जशीट के अनुसार, नान ने आदिवासी इलाकों में आयोडाइज्ड नमक की जगह घटिया क्वालिटी की सामग्री की आपूर्ति की।
  • ऊंचे संरक्षण का रैकेट: चार्जशीट में बताया गया था कि नान के जिला प्रबंधक और मुख्यालय के अधिकारी सरकार में उच्च स्तर संरक्षण प्राप्त रैकेट को चला रहे थे।
  • जांच पर सवाल: की शुरूआती कार्रवाई के बाद यह आरोप लगा कि बहुत से लोक सेवक, जिनके पास घोटाले की रकम पहुंचाने के पुख्ता सबूत थे, उनसे पूछताछ तक नहीं हुई। ने केवल कुछ लोगों को अभियुक्त बनाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की थी।
  • विवादित जांच: में कांग्रेस सरकार बनने के बाद जांच का गठन हुआ, लेकिन तब के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने और जांच का विरोध करते हुए याचिकाएं लगाई थीं।

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