बालोद। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने बालोद जिले में शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी की गंभीर शिकायत की है। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मर्कले के 30 सितंबर 2025 को रिलीव होने के बाद भी योगदास साहू बालोद जिले में अपने कब्जे से बाज नहीं आ रहे हैं। नई जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी के कार्यभार संभालने के बाद भी साहू छुट्टियों में दफ्तर में दाखिल होकर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी कर रहे हैं और विभाग को अपनी निजी दुकान बना चुके हैं।
मोहन निषाद के अनुसार, योगदास साहू निलंबित फाइलें जबरदस्ती बाबुओं से मंगवाकर स्वयं हस्ताक्षर करते हैं और जो बाबू विरोध करता है, उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। साहू ने निलंबित डीपी कोसरे को भी अपने साथ जोड़ रखा है, वहीं लेखराम साहू जैसे कर्मचारियों को भी अपने गिरोह में शामिल कर लिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि निलंबित शिक्षकों की बैकडेट बहाली की जा रही है, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ा रही है।
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कानूनी धाराएँ जो योगदास साहू पर लागू होती हैं:
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BNNS धारा 316 – आपराधिक विश्वासघात और पद का दुरुपयोग
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BNNS धारा 318 – धोखाधड़ी एवं छलपूर्वक लाभ अर्जित करना
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BNNS धारा 336 – जाली दस्तावेज़ तैयार करना
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BNNS धारा 337 – फर्जी दस्तावेज़ का उपयोग करना
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BNNS धारा 61(2) – सरकारी कार्य में अवैध हस्तक्षेप
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित) – रिश्वतखोरी और अवैध लेन-देन
बालोद शिक्षा विभाग आज रिश्वतखोर अफसरों का अड्डा बन चुका है। पूर्व अफसर के छुट्टियों में भी कार्यालय पर कब्जा जमाए भ्रष्टाचार करने की कार्रवाई प्रशासन की नाकामी और मिलीभगत को दर्शाती है।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने जिला प्रशासन से अपील की है कि शीघ्र इस मामले में FIR दर्ज कर सख्त जांच करवाई जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए। साथ ही डीओ ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज जांच कर सच सामने लाने की भी मांग की है।
यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो बालोद जिला शिक्षा के बजाय भ्रष्टाचार का गढ़ बनकर रह जाएगा।











