Gandhi Jayanti 2025 : रायपुर, छत्तीसगढ़। आज जब पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है, आइए याद करते हैं आजादी की लड़ाई के दौरान छत्तीसगढ़ से उनका अटूट नाता। महात्मा गांधी अपने जीवनकाल में दो बार छत्तीसगढ़ आए थे, और उनके ये दौरे राज्य के इतिहास में मील के पत्थर साबित हुए।
READ MORE : Dussehra 2025 : छत्तीसगढ़ का अजूबा दशहरा, रावण दहन नहीं, सहस्त्रबाहु वध, पढ़े अनोखी परंपरा…
Gandhi Jayanti 2025 : पहला आगमन: 1920 का कंडेल सत्याग्रह
गांधीजी का छत्तीसगढ़ में पहला आगमन आज से 105 साल पहले, 20 दिसंबर 1920 को हुआ था।
- उद्देश्य: वे धमतरी जिले के कंडेल ग्राम में चल रहे प्रसिद्ध सत्याग्रह के समर्थन में आए थे।
- रायपुर में स्वागत: बापू को कलकत्ता से ट्रेन में लेकर ‘छत्तीसगढ़ के गांधी’ पं. सुंदरलाल शर्मा रायपुर पहुंचे थे। रेलवे स्टेशन पर पं. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, पं. वामनराव लाखे जैसे दिग्गज स्वतंत्रता सेनानियों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया।
- गांधी चौक: गांधीजी ने रायपुर के वर्तमान गांधी चौक पर एक विशाल सार्वजनिक सभा को संबोधित किया, जिसके बाद ही इस स्थान का नाम गांधी चौक पड़ा।
- तिलक स्वराज फंड: उन्होंने ब्राह्मणपारा स्थित आनंद समाज वाचनालय प्रांगण में महिलाओं की एक सभा को संबोधित किया, जहाँ महिलाओं ने तिलक स्वराज फंड के लिए लगभग ₹2000 मूल्य के गहने दान दिए थे।
- धमतरी दौरा: 21 दिसंबर को गांधीजी धमतरी, कंडेल और कुरुद ग्राम भी गए और कंडेल सत्याग्रह में शामिल हुए। इसके बाद वे नागपुर में 26 दिसंबर 1920 को आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में हिस्सा लेने रवाना हो गए।
दूसरा आगमन: 1933 में छुआछूत के खिलाफ अभियान
महात्मा गांधी 1933 में दूसरी बार छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्य प्रांत) के बलौदाबाजार आए, और उनका यह दौरा सामाजिक समरसता के लिए समर्पित था।
READ MORE : Chhattisgarh Liquor Scam : ED ने किया आबकारी अधिकारियों को तलब, फिर गरमाई जांच…
- दलित के हाथ से पानी: बलौदाबाजार के मंडी प्रांगण में सभा को संबोधित करने के बाद उन्होंने वहाँ मौजूद कुएँ से एक दलित से पानी निकलवाकर उसके ही हाथों से पानी पिया था। यह घटना छुआछूत के खिलाफ उनके सशक्त संदेश को दर्शाती है।
- मंदिर प्रवेश: गांधीजी बलौदाबाजार के जगन्नाथ मंदिर (अब गोपाल मंदिर) भी गए, जहाँ उन्होंने कुछ दलितों के साथ मंदिर में प्रवेश किया। मंदिर में भगवान को रेशमी वस्त्र में देखकर उन्होंने खादी का वस्त्र पहनाने को कहा और खादी मंगवाकर भेंट किया।
इस यात्रा के दौरान उनके साथ रघुनाथ प्रसाद केसरवानी, मनोहर दास वैष्णव और अन्य स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौजूद थे।
महात्मा गांधी के ये दोनों छत्तीसगढ़ दौरे न केवल आजादी की लड़ाई के लिए, बल्कि सामाजिक समानता और समरसता के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।











