बेंगलुरु। घरेलू कामगार से बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व हासन सांसद प्रज्वल रेवन्ना ने कर्नाटक हाई कोर्ट में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। निचली अदालत ने 2 अगस्त 2025 को रेवन्ना को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 11 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया गया था।
अपील में रेवन्ना ने पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि FIR घटना के तीन साल बाद दर्ज की गई, जिससे मामले की विश्वसनीयता पर संदेह होता है। रेवन्ना ने यह भी दावा किया कि जिस महिला ने आरोप लगाए, वह 2023 में उनके फार्महाउस कार्यक्रम में उपस्थित थी, जबकि घटना 2020 की बताई जा रही है।
बचाव पक्ष ने सबूतों में खामियां भी उठाई। उनका कहना है कि जिस मोबाइल फोन में कथित हमले का वीडियो था, उसे कभी जब्त नहीं किया गया। इसके अलावा, जिन कपड़ों और बैग को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया, उसमें विरोधाभास पाए गए और महिला ने उनकी पहचान भी नहीं की। इससे सबूतों की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
रेवन्ना ने अपील में यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक प्रेरणा से भरा था और FIR दर्ज करने से लेकर सबूत इकट्ठा करने तक कई स्तर पर चूक हुई। उन्होंने हाई कोर्ट से निचली अदालत का फैसला रद्द करने और उन्हें बरी करने की मांग की है।
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निचली अदालत ने हालांकि अपने आदेश में कहा था कि वीडियो, फॉरेंसिक सामग्री और गवाहों के बयानों से रेवन्ना की भूमिका साबित होती है। अब हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी और अदालत तय करेगी कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा जाए या अपील मंजूर की जाए।
यह मामला कर्नाटक राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें जनता के बीच विश्वास और पुलिस जांच की विश्वसनीयता दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।













