भोपाल – सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े पीड़ितों की स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने के लिए तलब किया। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, ICMR के महानिदेशक, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस भेजा।
यह कार्रवाई उस अवमानना याचिका पर की गई जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2012 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में पीड़ितों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
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साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन बनाम भारत संघ’ मामले में कई अहम निर्देश जारी किए थे। इनमें पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड का कम्प्यूटरीकरण और उन्हें समुचित मेडिकल देखभाल उपलब्ध कराने के उपाय शामिल थे।
कोर्ट ने इस मामले की निगरानी और प्रशासनिक पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के लिए इसे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर पीठ को ट्रांसफर कर दिया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन निर्देशों का सही तरीके से अनुपालन नहीं किया गया, जिससे पीड़ितों की समस्याएँ बनी हुई हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।













