नई दिल्ली, 7 सितंबर। लाल सागर (Red Sea) के नीचे बिछी अंडरसी इंटरनेट केबल के क्षतिग्रस्त होने से भारत समेत कई एशियाई देशों में इंटरनेट की गति धीमी पड़ गई है। इस घटना ने ग्लोबल कनेक्टिविटी पर असर डाला है, जिसके चलते यूजर्स को कनेक्शन की समस्या और स्पीड में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट मॉनिटरिंग एजेंसी NetBlocks ने भी स्थिति की पुष्टि की है।
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कनेक्टिविटी पर पड़ा असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, समुद्र के नीचे मौजूद यह सबमरीन केबल वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क का अहम हिस्सा है। इसके डैमेज होने के बाद कई इलाकों में इंटरनेट स्पीड काफी कम हो गई है।
माइक्रोसॉफ्ट ने भी चेतावनी दी है कि रेड सी क्षेत्र में केबल्स डैमेज होने से इंटरनेट की लेटेंसी (Latency) बढ़ सकती है यानी डेटा ट्रांसफर की रफ्तार और धीमी हो सकती है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि जो केबल्स मिडिल ईस्ट से होकर नहीं गुजरतीं, वे इस समस्या से प्रभावित नहीं होंगी।
हूती विद्रोहियों पर शक
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, यमन के हूती विद्रोही इन केबल्स को निशाना बना सकते हैं। इसे इजरायल पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी बताया जा रहा है। हालांकि, हूती विद्रोही पहले भी इस तरह के अटैक्स से इनकार कर चुके हैं।
क्या हैं अंडरसी केबल्स?
अंडरसी केबल्स समुद्र के भीतर बिछाई गई फाइबर-ऑप्टिक केबल्स होती हैं। इनके जरिए इंटरनेट, टेलीफोन कॉल और डेटा ट्रांसफर किया जाता है।
- इन केबल्स से लाइट सिग्नल की मदद से डेटा ट्रांसफर होता है।
- इन्हें वैश्विक इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ (Backbone) माना जाता है।
- दुनिया के 95% से अधिक इंटरनेशनल डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से गुजरता है।
तथ्य एक नजर में
- रेड सी में अंडरसी केबल डैमेज
- भारत समेत कई एशियाई देशों पर असर
- NetBlocks और Microsoft ने पुष्टि की
- इंटरनेट लेटेंसी और स्पीड पर असर
- हूती विद्रोहियों पर शक











