रजनीश सिंह/मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपने अधिकारों को लेकर सड़क पर उतर आईं। सोमवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और आठ सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले 50 वर्षों से वे लगातार सेवाएं दे रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें न तो शासकीय कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य बुनियादी सुविधाएं।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि वर्ष 1975 से आईसीडीएस योजना के तहत वे केंद्र और राज्य सरकार को सेवाएं दे रही हैं। पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के बावजूद भी उनका मानदेय बेहद कम है। वर्तमान में कार्यकर्ता को केवल ₹4500 और सहायिका को ₹2250 मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जिसे वे “न्यूनतम मजदूरी से भी कम” बता रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी प्रमुख मांगों में शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने, सेवा निवृत्ति पर पेंशन-ग्रेच्युटी और समूह बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने, कार्यकर्ता को तृतीय श्रेणी और सहायिका को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित करने की बात रखी। इसके अलावा, उन्होंने सहायिका को कार्यकर्ता और कार्यकर्ता को सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति देने, महंगाई भत्ता लागू करने और आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति देने की भी मांग की।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार ने भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और अब वर्तमान सरकार से भी उन्हें निराशा ही मिल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरना स्थल पर जिला अध्यक्ष नीता दास ने कहा कि “हम लोग 50 वर्षों से समाज के निचले तबके तक योजनाएं पहुंचाने का काम कर रहे हैं, लेकिन बदले में हमें सम्मान और सुविधाएं नहीं मिलीं। अब वक्त आ गया है कि सरकार हमारी समस्याओं को गंभीरता से सुने।”













