Monday, September 21, 2026
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स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ने ली जान : गर्भवती महिला और शिशु की दर्दनाक मौत

सिंगरौली : सिंगरौली जिले की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था ने दो जिंदगियाँ ले लीं। बरगवां नगर परिषद के मैरहा गांव में रहने वाले रामलल्लू बैगा की गर्भवती पत्नी सुषमा बैगा की दर्दनाक मौत उस समय हुई जब समय पर इलाज और एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। गर्भस्थ शिशु की भी इस दौरान मौत हो गई।

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मदद के लिए करता रहा कॉल, नहीं आई 108 एंबुलेंस
घटना बीती रात हुई। महिला की तबीयत बिगड़ने पर पति रामलल्लू बैगा ने 108 एंबुलेंस सेवा को बार-बार फोन किया। उन्हें बार-बार यह कहा गया कि एंबुलेंस देवसर गई है या बैढ़न से भेजनी पड़ेगी। घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। मजबूरी में पति ने प्राइवेट टेंपो का सहारा लिया और पत्नी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरगवां ले गया।

अस्पताल में भी नहीं मिला समय पर इलाज
बरगवां अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। नर्सों ने इलाज की कोशिश की, लेकिन समय पर उचित उपचार न मिलने से महिला और उसका गर्भस्थ शिशु दोनों की मौत हो गई। गांववालों और परिजनों का कहना है कि अगर समय पर एंबुलेंस और डॉक्टर उपलब्ध होते तो जान बच सकती थी।

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शव वाहन तक नहीं मिला, मजबूर पति ने ऑटो में ले गया शव
मौत के बाद शव ले जाने के लिए अस्पताल ने शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया। इसके बावजूद रामलल्लू बैगा को मजबूरी में ऑटो (टेंपो) में पत्नी का शव घर ले जाना पड़ा। यह दृश्य पूरे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए शर्मनाक है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
सिंगरौली जिला प्रदेश को करोड़ों का राजस्व देता है, लेकिन यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद कमज़ोर हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल तक डॉक्टरों और संसाधनों की कमी आम जनता की जान पर भारी पड़ रही है।

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घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब एंबुलेंस या शव वाहन न मिलने से किसी मरीज की जान गई हो, लेकिन जिम्मेदार अब तक मौन साधे हुए हैं।

बाइट: मृतका के पति रामलल्लू बैगा ने कहा,
“अगर समय पर एंबुलेंस आती और अस्पताल में डॉक्टर होते तो मेरी पत्नी और बच्चा बच सकते थे। यह हमारी पूरी जिंदगी का सबसे बड़ा दुःख है।”

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