नई दिल्ली। क्या आपके टूथपेस्ट में बाल होंगे? सुनने में अजीब लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि भविष्य में दांतों की कैविटी का इलाज इंसानी बालों से किया जा सकेगा। किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पाया है कि बालों और ऊन में पाया जाने वाला केराटिन प्रोटीन दांतों के इनेमल जैसी परत बना सकता है, जो दांतों को सड़न और संवेदनशीलता से बचाएगा।
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फ्लोराइड से बेहतर विकल्प
अभी तक टूथपेस्ट में मौजूद फ्लोराइड दांतों को मजबूत बनाने के लिए सबसे अहम माना जाता है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि केराटिन शुरुआती नुकसान की मरम्मत फ्लोराइड से भी बेहतर ढंग से कर सकता है। यह इनेमल जैसी परत बनाकर दांतों की नसों को ढक देता है और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है।
कैसे काम करता है केराटिन
- केराटिन एक प्रोटीन है, जो इंसानी बाल, नाखून, त्वचा और भेड़ की ऊन में पाया जाता है।
- वैज्ञानिकों ने ऊन से इसे निकालकर दांतों पर लगाया।
- लार के खनिजों के साथ मिलकर यह इनेमल जैसी परत बनाने लगा।
- यह परत दांतों को धीरे-धीरे मजबूत कर सकती है और सड़न रोक सकती है।
दो-तीन साल में आ सकता है प्रोडक्ट
शोधकर्ताओं का कहना है कि आने वाले दो से तीन साल में केराटिन आधारित दंत-उत्पाद बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। इससे दांतों की मरम्मत आसान होगी और मरीजों को महंगी दवाइयों या जटिल इलाज की जरूरत कम पड़ेगी।
बड़ा फायदा
- केराटिन दंत उपचार में पर्यावरण हितैषी विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि यह बाल और ऊन जैसे अपशिष्ट पदार्थों से प्राप्त होता है।
- इससे दांतों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले हानिकारक प्लास्टिक रेजिन की जगह ली जा सकती है।
यह अध्ययन Advanced Healthcare Materials नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज दंत चिकित्सा में एक नया अध्याय खोल सकती है।











