Halashasthi 2025 : छत्तीसगढ़ में कमरछठ, जिसे हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, विशेष धार्मिक महत्व का त्योहार है। यह पर्व मुख्य रूप से संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए मनाया जाता है। इस दिन माताएं भगवान शिव-पार्वती और भगवान बलराम (हलधर) की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखकर अपने बच्चों की रक्षा और दीर्घायु की कामना करती हैं।
Halashasthi 2025 : हलषष्ठी का महत्व
हलषष्ठी व्रत संतान की सुरक्षा, रोगों से मुक्ति और परिवार में सुख-शांति तथा समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, यह दिन भगवान बलराम की जयंती भी है, जो भगवान कृष्ण के बड़े भाई और हलधर के नाम से विख्यात हैं। किसान समुदाय के लिए भी यह त्योहार खास है क्योंकि इस दिन खेती से जुड़े महुआ, पसई के चावल, चना, मक्का, ज्वार और सोयाबीन जैसी फसलों की पूजा होती है।
छत्तीसगढ़ में कमरछठ की खास रीतियां
इस दिन महिलाएं दो तालाब (सगरी) बनाकर उसमें भगवान शिव-पार्वती और बलराम की मूर्तियां स्थापित करती हैं। व्रत में हल से जुड़े हुए अनाज का सेवन वर्जित होता है, इसलिए पसहर चावल (जो बिना जोते उगता है) का प्रयोग किया जाता है। गाय के दूध की जगह भैंस के दूध का इस्तेमाल पूजा में होता है। महिलाएं महुआ, बेर की डाल, कांस के फूल से सगरी को सजाती हैं और विधिपूर्वक पूजा करती हैं। पूजा के बाद कमरछठ की कथा सुनाई जाती है और शाम को सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
यह पर्व छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का अहम हिस्सा है, जो परिवार और समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि का संदेश लेकर आता है।
इस बार भी छत्तीसगढ़ में कमरछठ धूमधाम से मनाया जाएगा और माता-पिता अपनी संतान की लंबी उम्र एवं स्वस्थ जीवन की प्रार्थना में जुटेंगे।











