Electricity Theft : नई दिल्ली – देश में बिजली चोरी रोकने और बिलिंग को पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट मीटर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन तकनीक के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर भी सावधानी जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता खुद भी अपने मीटर की सुरक्षा जांच सकते हैं। आइए जानते हैं स्मार्ट मीटर की सुरक्षा जांचने के 7 आसान और पुख्ता तरीके:
1. टेंपर अलर्ट की जाँच
स्मार्ट मीटर में छेड़छाड़ जैसे – कवर खोलना, चुंबक लगाना या मीटर को उल्टा घुमाना – होने पर ऑटोमैटिक अलर्ट भेजने की सुविधा होती है। उपभोक्ता को बिजली कंपनी से यह पुष्टि करनी चाहिए कि टेंपर डिटेक्शन फीचर एक्टिव है या नहीं।
2. सील और कवर की जाँच
मीटर पर लगी अधिकृत सील – चाहे वह होलोग्राम हो, प्लास्टिक या धातु की – टूटी हुई या बदली हुई नहीं होनी चाहिए। अगर सील में खरोंच, दरार या नकली नंबर दिखाई दें, तो तुरंत बिजली विभाग को शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
3. डिस्प्ले लॉग देखना
अधिकांश स्मार्ट मीटर के डिस्प्ले पर पिछले दिनों या महीनों की बिजली खपत का रिकॉर्ड देखा जा सकता है। यदि अचानक खपत में गिरावट या असामान्य बदलाव दिखे, तो संभव है कि डेटा में छेड़छाड़ की गई हो।
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4. मोबाइल ऐप / वेब पोर्टल से तुलना
बिजली कंपनी के मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर दिखाई दे रही खपत को मीटर की रियल-टाइम रीडिंग से मिलाएँ। यदि दोनों में बड़ा अंतर है, तो यह या तो डेटा ट्रांसमिशन की समस्या हो सकती है या संभावित टेंपरिंग का मामला।
5. कम्युनिकेशन मॉड्यूल टेस्ट
स्मार्ट मीटर का RF, GSM या PLC मॉड्यूल सही तरीके से डेटा भेज रहा है या नहीं, यह बिजली कंपनी रिमोट से चेक कर सकती है। कई हैकिंग मामलों में पाया गया है कि सबसे पहले नेटवर्क मॉड्यूल को डिसेबल किया जाता है।
6. फर्मवेयर वर्ज़न वेरिफिकेशन
बिजली विभाग से यह पुष्टि करें कि आपके मीटर का फर्मवेयर वर्ज़न ऑफिशियल और अपडेटेड है। हैकर्स कई बार पुराना या मॉडिफाइड फर्मवेयर डालकर मीटर के सुरक्षा सिस्टम को धोखा देते हैं।
7. EMI/चुंबकीय हस्तक्षेप टेस्ट
बिजली कंपनी का तकनीकी स्टाफ EMI डिटेक्शन डिवाइस के जरिए जांच करता है कि कहीं मीटर को चुंबक या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज़रिए प्रभावित तो नहीं किया गया है।
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स्मार्ट मीटर बिजली चोरी रोकने और सही बिलिंग के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ बिजली कंपनी की नहीं, उपभोक्ता की भी है। नियमित जांच से न केवल बिलिंग में पारदर्शिता बनी रहती है, बल्कि धोखाधड़ी और चोरी के मामले भी रोके जा सकते हैं।













