nun arrest : रायपुर/दुर्ग : दुर्ग रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ कथित मानव तस्करी और धर्मांतरण का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। 25 जुलाई को दुर्ग स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने तीन आदिवासी लड़कियों, एक युवक और दो मिशनरी ननों को रोका और मानव तस्करी का आरोप लगाते हुए GRP थाने में शिकायत की। दोनों नन – प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस – बीते 9 दिनों से दुर्ग जेल में बंद हैं। आज 2 अगस्त को बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर फैसला आना है।
nun arrest : केस की कानूनी स्थिति और कोर्ट की कार्रवाई
nun arrest : ननों के खिलाफ GRP ने BNS की धारा 143 (मानव तस्करी) और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 4 (बिना अनुमति धर्मांतरण) के तहत FIR दर्ज की है। ये धाराएं गैर-जमानती और गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं। 30 जुलाई को दुर्ग जिला कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने 5 अहम बिंदुओं का हवाला देते हुए कहा कि—
* यह साधारण नहीं बल्कि गंभीर प्रकृति का अपराध है।
* आदिवासी बालिकाओं को बिना सूचना राज्य से बाहर ले जाना संदेह पैदा करता है।
* जमानत देने पर सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
* मामला भविष्य में NIA को सौंपा जा सकता है।
* NIA अधिनियम के तहत दुर्ग कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं।
nun arrest : NIA कोर्ट में सुनवाई और फैसला
nun arrest : 1 अगस्त को बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 2 अगस्त को फैसला सुनाने की बात कही। ननों के वकील का दावा है कि पुलिस के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं और ननों को जल्द जमानत मिल सकती है।
nun arrest : पीड़िता ने मीडिया के सामने खोला सच
nun arrest : तीन लड़कियों में से एक – कमलेश्वरी, जो नारायणपुर के अबूझमाड़ की निवासी है, ने 1 अगस्त को मीडिया से कहा, “हम अपनी मर्जी से आगरा जा रहे थे। ननों ने कोई गलत व्यवहार नहीं किया। थाने में हमसे मारपीट कर जबरन बयान बदलवाया गया। मेरा परिवार पिछले 5-6 साल से ईसाई धर्म मानता है।”
nun arrest : राजनीतिक और सामाजिक असर
nun arrest : इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है।
लोकसभा और राज्यसभा में मामला उठा।
केरल से सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दुर्ग जेल पहुंचा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर ननों की गिरफ्तारी को “अन्याय” बताया।
केरल के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने केस रद्द करने की मांग की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने गिरफ्तारी को धार्मिक असहिष्णुता और भीड़तंत्र का उदाहरण बताया।
केरल के कोच्चि, एर्नाकुलम, अंगामाली में बड़े स्तर पर ईसाई समुदाय ने प्रदर्शन किया और इसे संविधानिक अधिकारों पर हमला बताया।
nun arrest : मामले की शुरुआत कैसे हुई?
nun arrest : 25 जुलाई को मिशनरी नन और एक युवक तीन आदिवासी लड़कियों को लेकर ट्रेन से आगरा जा रहे थे। स्टेशन पर एक लड़की के रोने और बातचीत में कुछ संदिग्ध बातें सुनने पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोका। GRP थाना ले जाकर FIR दर्ज करवाई गई और आरोप लगाया कि यह मामला धर्मांतरण और मानव तस्करी से जुड़ा है।
nun arrest : क्या है मानव तस्करी कानून?
nun arrest : मानव तस्करी एक संगठित अपराध है जिसमें धोखे, लालच या जबरदस्ती से लोगों को उनके घर से दूर ले जाकर उनका शोषण किया जाता है। इसमें जबरन मजदूरी, यौन शोषण, अंग व्यापार, या जबरन विवाह शामिल हो सकते हैं। बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों में यह अपराध और भी संगीन माना जाता है।
nun arrest : अब आगे क्या?
nun arrest : आज (2 अगस्त) को NIA कोर्ट यह तय करेगा कि ननों को जमानत मिलेगी या नहीं। वहीं, पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए NIA द्वारा जांच अपने हाथ में लिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
nun arrest : यह मामला अब केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं रहा, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है – जहां एक ओर ननों को निर्दोष बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठनों द्वारा इसे गंभीर साजिश बताया जा रहा है।इस केस में आगे होने वाला हर फैसला, छत्तीसगढ़ ही नहीं, देशभर में असर डालेगा।













