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Bihar news : चुनाव आयोग की SIR रिपोर्ट से उठा सियासी तूफान, 65 लाख वोटर सूची से हटने की संभावना पर बवाल

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Bihar news : चुनाव आयोग की SIR रिपोर्ट से उठा सियासी तूफान, 65 लाख वोटर सूची से हटने की संभावना पर बवाल
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Bihar news/पटना। चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR – Special Intensive Revision) की पहली रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में करीब 65 लाख वोटरों के नाम संभावित तौर पर मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं, जिनमें मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट नाम शामिल हैं। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना सक्षम प्राधिकारी (ERO) की नोटिस प्रक्रिया और जांच के किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।

आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है और यह डिजिटल सत्यापन, घर-घर सर्वे, और राजनीतिक दलों के ब्लॉक लेवल एजेंट्स (BLAs) की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

विपक्ष ने लगाया जनाधार खत्म करने का आरोप

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस पर सख्त ऐतराज जताते हुए इसे “जनादेश से छेड़छाड़” बताया। उनका आरोप है कि दलित, मुसलमान और गरीब तबकों के वोटर टारगेट कर हटाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया में सभी दलों की भागीदारी रही है और कोई भी नाम बिना आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिए नहीं हटाया जाएगा।

आंकड़ों में देखें मतदाता शुद्धिकरण

चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार की कुल 7.24 करोड़ की मतदाता सूची में से 91.69% (करीब 6.64 करोड़) वोटरों का फॉर्म प्राप्त हो चुका है।

  • इनमें से 2.83% यानी लगभग 22 लाख वोटर मृत पाए गए।
  • 4.59% यानी करीब 36 लाख लोग या तो स्थानांतरित हो चुके हैं या फिजिकली नहीं मिले।
  • 0.89% यानी 7 लाख वोटर डुप्लिकेट पाए गए।

इस प्रकार कुल 65 लाख वोटरों के नाम संभावित रूप से हटाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी ड्राफ्ट लिस्ट 1 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी। जिनके नाम हटेंगे, उन्हें नोटिस जारी कर दावा/आपत्ति का अवसर दिया जाएगा।

BLA और BLO की बड़ी भागीदारी

SIR के पहले चरण में 1.6 लाख से अधिक BLAs ने हिस्सा लिया, जो कि पिछले वर्षों के मुकाबले 16% अधिक है। साथ ही 1.6 लाख से ज्यादा BLO (Booth Level Officer) भी इस सत्यापन में तैनात किए गए हैं।

आयोग की अपील

चुनाव आयोग ने कहा है कि 1 अगस्त से 1 सितंबर तक का समय लोगों के लिए दावा-आपत्ति दर्ज करने के लिए है, ऐसे में विपक्ष का यह कहना कि “65 लाख वोटर हटा दिए गए”, पूरी तरह गलत है। आयोग ने राजनीतिक दलों से भी अपील की है कि वे अपने एजेंट्स के माध्यम से गलत नाम हटने से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करें।

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