नई दिल्ली। NEET-UG 2025 परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने से प्रभावित छात्रों की दोबारा परीक्षा कराने की मांग वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी हैं। शुक्रवार को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय लेना नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का अधिकार है, न कि अदालत का।
छात्रों की ओर से दायर दो याचिकाओं में मध्य प्रदेश के परीक्षा केंद्रों पर बिजली कटौती के चलते परीक्षा में व्यवधान का हवाला देते हुए रि-एग्जाम की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला तर्कसंगत और उचित है, और इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
बिजली कटौती के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने का था आरोप
छात्रों की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि परीक्षा केंद्रों पर बिजली जाने के दौरान कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए, जिससे परीक्षा देने में कठिनाई हुई। लेकिन एनटीए की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा में देशभर के लाखों छात्र शामिल हुए थे, और अब काउंसलिंग की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। ऐसे में दोबारा परीक्षा कराना व्यावहारिक रूप से असंभव होगा।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित था हाईकोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इंदौर हाईकोर्ट ने इस मामले में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर सभी संभावित पहलुओं की जांच की थी और उसके बाद ही दोबारा परीक्षा की मांग को खारिज किया गया था।
75 छात्रों का रिजल्ट जारी, अब काउंसलिंग में होंगे शामिल
इससे पहले 14 जुलाई को इंदौर हाईकोर्ट ने 75 से अधिक छात्रों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उसी दिन शाम को हाईकोर्ट का आदेश वेबसाइट पर अपलोड हुआ और NTA ने उन छात्रों का रिजल्ट जारी कर दिया था, जिनके परिणामों पर पहले रोक लगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि जिन छात्रों के परिणाम अब जारी हो चुके हैं, वे NEET की काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब NEET-UG 2025 की दोबारा परीक्षा की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। अदालत ने यह साफ कर दिया है कि नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में किसी भी बदलाव का अधिकार केवल NTA के पास है, और न्यायिक हस्तक्षेप सीमित दायरे में ही किया जा सकता है।













