Saturday, August 15, 2026
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Nalwa Cement Plant : जिंदल की खदान के खिलाफ खरोरा में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जनसुनवाई का किया विरोध, आत्मदाह की चेतावनी

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Nalwa Cement Plant : रायपुर/खरोरा। रायपुर से लगे खरोरा क्षेत्र के मोतिमपुर गांव में जिंदल के नलवा सीमेंट प्लांट द्वारा प्रस्तावित खदान के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आज सुबह फूट पड़ा। भारी बारिश के बीच भी ग्रामीण टेंट लगाकर खदान स्थल पर डटे रहे और जमकर नारेबाजी की। छह गांवों से जुटे करीब 900 लोगों ने खदान परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए जनसुनवाई रुकवाने की मांग की।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि खदान में चूना पत्थर निकालने के लिए ब्लास्टिंग की जाएगी, जिससे आसपास के गांवों के घरों में दरारें आ सकती हैं और कंपन के कारण जीवन प्रभावित होगा। वहीं भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त होने और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

55 हजार लोग प्रभावित, गांवों की दूरी महज 90 से 400 मीटर

ग्रामीणों के अनुसार, यह खदान 1100 एकड़ में फैली होगी और छह गांव – पचरी (90 मीटर), छड़िया (140 मीटर), मंधईपुर (170 मीटर), मोतिमपुर (230 मीटर), आलेसुर (350 मीटर) और नहरडीह (400 मीटर) इससे सीधा प्रभावित होंगे। इन गांवों की कुल जनसंख्या करीब 55,000 है।

एक रात पहले से डटे ग्रामीण, भारी पुलिस बल तैनात

जनसुनवाई को रोकने के लिए ग्रामीण एक दिन पहले ही टेंट लगाकर जनसुनवाई स्थल पर जुट गए थे। मौके पर करीब 400 पुलिसकर्मी, अपर कलेक्टर, पर्यावरण अधिकारी, एसपी, और 6 तहसीलदार तैनात हैं।

ग्रामीणों की भीड़ में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो बारिश में छाता लेकर विरोध प्रदर्शन में डटे रहे।

“जनसुनवाई नहीं होने देंगे”, आत्मदाह की चेतावनी

पचरी के सरपंच और सरपंच संघ अध्यक्ष अभिषेक वर्मा ने बताया कि जनप्रतिनिधियों के साथ गांववाले सुबह से ही विरोध स्थल पर मौजूद हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जबरन जनसुनवाई कराता है तो वे आत्मदाह जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

पर्यावरणीय और सामाजिक चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि खदान से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि खेती, पशुपालन और जलस्त्रोतों पर भी गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही, रात में होने वाली ब्लास्टिंग और ट्रक आवाजाही से नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन ने कहा है कि जनसुनवाई नियमानुसार होगी और ग्रामीणों की सभी आपत्तियों को रिकॉर्ड में लिया जाएगा। पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया के तहत सभी आपत्तियों को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

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