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MP NEWS : मऊगंज में बारिश बनी कहर-ढाबा तिवारियान गांव में 47 हरिजन परिवार बेघर, प्रशासन की तैयारियों पर सवाल

MP NEWS : मऊगंज, मध्यप्रदेश। जिले में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हनुमना जनपद के ढाबा तिवारियान गांव में हालात सबसे अधिक भयावह हैं, जहां तेज बारिश के चलते हरिजन समुदाय के 47 से अधिक कच्चे घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए। इस आपदा में सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं, हालांकि किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है।प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें ना कोई पूर्व चेतावनी मिली, और ना ही समय पर प्रशासनिक सहायता पहुँची। कच्चे मकानों के साथ उनका घरेलू सामान, कपड़े, अनाज और राशन सब बह गया। कई परिवारों को अब खुले आसमान के नीचे रातें बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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प्रशासन हरकत में, पर देर से

स्थिति की गंभीरता बढ़ने पर जब गांव से जिला प्रशासन को सूचना दी गई, तब जाकर राहत कार्य शुरू हुआ। जिला कलेक्टर संजय जैन और पुलिस अधीक्षक की निगरानी में राहत दल सक्रिय किए गए। प्रभावितों को ग्राम पंचायत भवन और नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट किया गया है, जहां अस्थायी रूप से भोजन और पेयजल की व्यवस्था की गई है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन परिवारों का स्थायी पुनर्वास कब और कैसे होगा? अब तक किसी पुनर्निर्माण या मुआवज़े को लेकर कोई ठोस घोषणा सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों में रोष, प्रशासन की नाकामी उजागर

गांव के सरपंच विनय कुमार तिवारी ने कहा, “बारिश का खतरा हर साल रहता है, लेकिन इस बार प्रशासन पूरी तरह सोता रहा। जब तक हालात नियंत्रण से बाहर नहीं हुए, कोई देखने तक नहीं आया।”

गांव के ही एक प्रभावित निवासी ने बताया कि घर गिरने के बाद उनकी सारी ज़िंदगी की जमा-पूंजी मिट्टी में मिल गई है। बच्चों की पढ़ाई, राशन की व्यवस्था और आने वाला समय अब उनके लिए सबसे बड़ा संकट बन चुका है।

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आपदा प्रबंधन पर उठे सवाल

इस त्रासदी ने एक बार फिर मऊगंज जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर साल बारिश के समय ऐसे हालात बनते हैं, लेकिन प्रशासन की तैयारियों में कोई सुधार नहीं दिखता। न तो बाढ़ संभावित क्षेत्रों का पूर्व सर्वेक्षण होता है, और न ही संवेदनशील इलाकों के लिए कोई विशेष योजना।

जवाबदेही तय होगी या नहीं…

अब सवाल उठता है — क्या प्रशासन सिर्फ राहत किट देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेगा, या इन परिवारों के पुनर्वास की ठोस कार्ययोजना भी सामने आएगी? जब तक जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक हर बरसात किसी नई त्रासदी की पटकथा लिखती रहेगी।

संजय जैन, कलेक्टर मऊगंज
“स्थिति बेहद गंभीर थी। हमने राहत टीमों को तुरंत रवाना किया। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है और भोजन, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। स्थायी पुनर्वास की योजना पर भी काम किया जा रहा है।”

विनय कुमार तिवारी, सरपंच, ग्राम पंचायत ढाबा तिवारियान
“हम लगातार प्रशासन से मदद की अपील कर रहे थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब हालात बिगड़े, तब कार्रवाई हुई। गांव के लोग बेहद संकट में हैं और जल्द स्थायी समाधान जरूरी है।”

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