Petrol Pump Scam: नई दिल्ली। पेट्रोल पंप पर तेल भरवाते समय ग्राहक आमतौर पर मशीन के डिस्प्ले पर दिखाई दे रही मात्रा को ही सही मानता है। अगर स्क्रीन पर 10 लीटर दिख रहा है, तो माना जाता है कि वाहन की टंकी में भी 10 लीटर पेट्रोल या डीजल गया है। लेकिन कर्नाटक में हुई हालिया जांच के बाद पेट्रोल पंप की मशीनों की सटीकता को लेकर सवाल उठे हैं।
Petrol Pump Scam: 805 पेट्रोल पंपों की जांच
कर्नाटक में अधिकारियों ने 805 पेट्रोल पंपों की मशीनों की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 768 पंपों पर मशीनों में किसी न किसी तरह की गड़बड़ी पाई गई। जांच के दौरान कुछ पंपों पर वास्तविक मात्रा और मशीन के डिस्प्ले में अंतर मिला। इसके बाद 101 पंपों के खिलाफ कार्रवाई की गई और कुल 6.66 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
क्या होता है कैलिब्रेशन?
कैलिब्रेशन का मतलब है कि मशीन जितना ईंधन दिखा रही है, वास्तव में उतना ही ईंधन ग्राहक को मिल रहा है या नहीं। उदाहरण के लिए, मशीन पर 10 लीटर दिख रहा है तो नोजल से करीब उतनी ही मात्रा में ईंधन निकलना चाहिए।
मशीन के अंदर फ्लो मीटर और डिस्पेंसिंग सिस्टम ईंधन की मात्रा को मापते हैं। इनमें गड़बड़ी होने पर डिस्प्ले पर दिखाई गई मात्रा और वास्तव में मिलने वाले ईंधन में अंतर हो सकता है।
कितनी कमी को माना जाता है गड़बड़ी?
कर्नाटक में हालिया कार्रवाई के दौरान अधिकारियों के मुताबिक, 10 लीटर पर 50 मिलीलीटर तक का अंतर अनुमत सीमा में था। इससे अधिक कमी मिलने पर कार्रवाई की गई। यानी हर छोटा अंतर अपने आप में नियम उल्लंघन नहीं माना जाता।
मशीन में खराबी से भी हो सकता है अंतर
हर मामले में यह जरूरी नहीं कि पेट्रोल पंप संचालक जानबूझकर कम तेल दे रहा हो। मशीन की तकनीकी खराबी या कैलिब्रेशन में बदलाव के कारण भी मात्रा में अंतर आ सकता है। इसलिए समय-समय पर मशीनों की जांच और कैलिब्रेशन जरूरी है।
शक होने पर ग्राहक क्या करे?
Petrol Pump Scam: अगर ग्राहक को तेल की मात्रा को लेकर शक है, तो वह पेट्रोल पंप पर 5 या 10 लीटर के मानक माप से मशीन की जांच कराने की मांग कर सकता है। इसलिए सिर्फ डिस्प्ले पर दिखाई दे रही मात्रा देखकर संतुष्ट होने के बजाय ग्राहक को मशीन की जांच और कैलिब्रेशन की जानकारी पर भी ध्यान देना चाहिए।






