Dhirendra Krishna Shastri Glasgow Statement: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बंगाल में मांस-मछली को लेकर दिए गए अपने बयान पर सफाई दी है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित सनातन संगम कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उनके बयान को सही संदर्भ में नहीं समझा गया और उनकी बात को अलग तरीके से पेश किया गया।धीरेंद्र शास्त्री ग्लासगो बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति के खान-पान या पहनावे पर रोक लगाने की बात करना नहीं था। उनके मुताबिक, उनकी बात धार्मिक स्थलों और पूजा के वातावरण की पवित्रता तथा मर्यादा को लेकर थी।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत अधिकारों पर सवाल नहीं उठाया। उनका कहना था कि धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धा और मर्यादा का वातावरण बना रहना चाहिए।धीरेंद्र शास्त्री ग्लासगो बयान ऐसे समय आया है, जब बंगाल में उनके पुराने बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं। उनके बयान को लेकर अलग-अलग पक्षों ने अपनी राय रखी थी।
सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने की बात
ग्लासगो के कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, उनका उद्देश्य सनातन संस्कृति और भगवान के संदेश को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि भारत हो या विदेश, वह धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर अपनी बात रखते रहेंगे।उनका कहना था कि वह अपनी विचारधारा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोगों के बीच संदेश देते रहेंगे। इसी क्रम में उन्होंने धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा और मर्यादा बनाए रखने की बात दोहराई।
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जीव हिंसा को लेकर भी रखी अपनी राय
धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान होने वाली पशु बलि को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह की जीव हिंसा के पक्ष में नहीं हैं और इस विषय पर अपनी बात आगे भी रखते रहेंगे।यह बयान भी उनके धीरेंद्र शास्त्री ग्लासगो बयान का अहम हिस्सा रहा, क्योंकि उन्होंने धार्मिक परंपराओं के साथ अहिंसा को लेकर अपनी सोच स्पष्ट की।
बंगाल और अपनी आध्यात्मिक परंपरा का किया जिक्र
बंगाल को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह खुद बंगाली परंपरा और संस्कृति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर नहीं देखा जा सकता।उन्होंने स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस और बामाखेपा जैसे संतों का उदाहरण भी दिया। उनके मुताबिक, बंगाल की आध्यात्मिक परंपरा का देश की सनातन परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान है।
हावड़ा की कथा के बाद शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, हावड़ा में हनुमंत कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दिनों को लेकर अपील की थी। उन्होंने पूजा स्थलों के आसपास मांस-मछली की बिक्री और सेवन से बचने की बात कही थी।इसके बाद उनके बयान को लेकर बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने उनके बयान का विरोध किया, जबकि उनके समर्थकों ने इसे धार्मिक वातावरण और आस्था से जुड़ा विषय बताया।अब ग्लासगो में दिए गए धीरेंद्र शास्त्री ग्लासगो बयान के जरिए उन्होंने अपने पुराने बयान का संदर्भ स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि उनकी बात का उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत पसंद या अधिकार तय करना नहीं था, बल्कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता और पूजा के माहौल को लेकर अपनी राय रखना था।







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