MP News: 3 महीने से राशन नहीं मिला, अब ₹17 किलो देने का आरोप! सिंगरौली में वायरल वीडियो से हड़कंप

Rahul Goshwami

Singrauli Ration Distribution Controversy: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- सिंगरौली जिले की सरई तहसील के लंघाडोल क्षेत्र में राशन वितरण को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें करीब तीन महीने से सरकारी राशन नहीं मिला है। राशन नहीं मिलने से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने धरना दिया था और प्रशासन से पूरे रिकॉर्ड की जांच कराने के साथ लंबित राशन दिलाने की मांग की थी।

अब इस मामले में एक कथित वीडियो सामने आने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे वीडियो में कोटेदार द्वारा राशन हितग्राहियों को कथित तौर पर ₹17 प्रति किलो के हिसाब से पैसे देने और दबाव बनाने की बात कही जा रही है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

148 क्विंटल स्टॉक ने पहले ही खड़े किए थे सवाल
इससे पहले सिंगरौली राशन वितरण विवाद में समिति की मशीन में करीब 148 क्विंटल राशन का स्टॉक दर्ज होने की बात सामने आई थी। दूसरी ओर ग्रामीण लंबे समय से राशन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे थे। ऐसे में रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और वास्तविक वितरण के बीच अंतर को लेकर सवाल उठने लगे।अब कथित वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों की मांग और तेज हो गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन मशीन में दर्ज राशन के आंकड़े, वितरण रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का मिलान कराए।

राशन की जगह पैसे देने की बात क्यों आई?
वायरल वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पात्र हितग्राहियों को करीब तीन महीने से राशन नहीं मिला था, तो अब उन्हें कथित तौर पर प्रति किलो के हिसाब से पैसे देने की जरूरत क्यों पड़ी?क्या यह लंबित राशन के बदले भुगतान से जुड़ा मामला है? या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है? इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है। सिंगरौली राशन वितरण विवाद की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों के सामने अब कई बड़े सवाल
मामले में यह भी जांच का विषय है कि मशीन में दर्ज करीब 148 क्विंटल राशन वास्तव में गोदाम या समिति के पास मौजूद था या नहीं। यदि स्टॉक मौजूद था, तो उसका वितरण किन लोगों को किया गया और कितनी मात्रा में किया गया, इसका रिकॉर्ड क्या कहता है?इसके अलावा, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे कथित भुगतान की भी जांच जरूरी है। प्रशासन को यह देखना होगा कि वीडियो कब बनाया गया, इसमें कौन लोग मौजूद हैं और ₹17 प्रति किलो की रकम देने की बात किस संदर्भ में कही गई।
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रिकॉर्ड, स्टॉक और वीडियो की जांच जरूरी
अब सिंगरौली राशन वितरण विवाद में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग रिकॉर्ड का मिलान करना है। मशीन में दर्ज स्टॉक, राशन वितरण का रिकॉर्ड, हितग्राहियों के बयान और मौके पर उपलब्ध वास्तविक राशन की जांच से ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है।साथ ही वायरल वीडियो की सत्यता की भी जांच जरूरी होगी। केवल सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।

ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
करीब तीन महीने से राशन का इंतजार कर रहे ग्रामीण अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले में पारदर्शी जांच होनी चाहिए और यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की आधिकारिक जांच और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल अहम होगी। इसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि 148 क्विंटल के दर्ज स्टॉक, तीन महीने से राशन नहीं मिलने की शिकायत और ₹17 प्रति किलो भुगतान के कथित वीडियो के बीच वास्तविक संबंध क्या है।

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