Indore Municipal: इंदौर नगर निगम में कांग्रेस को बड़ा झटका जिला कोर्ट ने वार्ड-60 की पार्षद सुनहरा अंसारी का चुनाव किया निरस्त, हाईकोर्ट जाएगी पार्टी

Anuj Nirala

Indore Municipal: इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा चुनाव में नामांकन विवाद के बाद अब इंदौर नगर निगम में भी पार्टी को कानूनी मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। जिला न्यायालय ने वार्ड क्रमांक-60 से निर्वाचित कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि नामांकन के दौरान दाखिल किए गए शपथ पत्र (एफिडेविट) में महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई थीं, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है।

इस फैसले के बाद नगर निगम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह जिला अदालत के फैसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती देगी, जबकि भाजपा ने इसे सत्य और पारदर्शिता की जीत बताया है।

Khandwa Protest: खंडवा में किसानों का हल्ला बोल ई-टोकन व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने वाटर कैनन से रोका; CM मोहन और शिवराज के पुतले फूंके

शपथ पत्र में संपत्ति और टैक्स की जानकारी छिपाने का आरोप

Indore Municipal: यह पूरा मामला पूर्व पार्षद इफ्तिखार मुन्ना अंसारी द्वारा दायर चुनाव याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सुनहरा अंसारी ने नामांकन दाखिल करते समय अपने शपथ पत्र में चल-अचल संपत्तियों, संपत्तियों पर बकाया कर और अन्य आवश्यक वित्तीय जानकारियों का सही खुलासा नहीं किया।

लंबी सुनवाई के बाद जिला न्यायालय ने रिकॉर्ड और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी अधूरी और अविश्वसनीय थी। इसी आधार पर न्यायालय ने वार्ड-60 से उनका निर्वाचन रद्द करते हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया।

राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के लिए दूसरा बड़ा झटका

प्रदेश कांग्रेस पहले ही राज्यसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार के नामांकन को लेकर विवादों का सामना कर चुकी है। अब इंदौर नगर निगम में आए इस फैसले ने पार्टी की राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे कानूनी विवाद कांग्रेस के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।

हाईकोर्ट जाएगी कांग्रेस, फैसले को बताएगी चुनौती योग्य

जिला अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि फैसले के खिलाफ कानूनी आधार मौजूद हैं और जल्द ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी। कांग्रेस को उम्मीद है कि उच्च न्यायालय से उसे राहत मिलेगी।

भाजपा ने कहा- कानून से बड़ा कोई नहीं

Indore Municipal: उधर भाजपा ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि न्यायालय ने तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया है। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव के दौरान गलत जानकारी देता है या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाता है, तो कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी पारदर्शिता को मजबूत करने वाला है।

Bhopal Cyber Fraud: भोपाल में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा ‘बधाई हो, आपने जीती थार कार’… एक फोन कॉल ने 55 वर्षीय व्यक्ति से ठग लिए 9.55 लाख रुपये

वार्ड-60 में फिर हो सकते हैं चुनाव

Indore Municipal: यदि हाईकोर्ट से कांग्रेस को राहत नहीं मिलती है, तो इंदौर नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 में दोबारा चुनाव कराए जाने की संभावना बन सकती है। ऐसे में यह मामला सिर्फ एक पार्षद की सदस्यता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नगर निगम की राजनीतिक तस्वीर और स्थानीय समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल जिला अदालत के फैसले के बाद सियासी संग्राम तेज हो गया है। अब सभी की नजरें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल होती है या फिर वार्ड-60 में एक बार फिर चुनावी बिगुल बजता है।

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *