Harda School Accident: हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले से शिक्षा विभाग की व्यवस्था और स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले के ग्राम हनीफाबाद स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को कक्षा संचालन के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ क्लासरूम के भीतर अचानक छत का सीमेंटेड प्लास्टर टूटकर नीचे गिर गया, जिसकी चपेट में आने से पहली कक्षा में पढ़ने वाली एक मासूम छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया।
पढ़ाई के बीच अचानक भरभराकर गिरी छत, बाल-बाल बचे 20 मासूम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम हनीफाबाद के शासकीय प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में रोज़ की तरह अध्यापन कार्य चल रहा था। घटना के समय कक्षा में करीब 20 बच्चे मौजूद थे और पूरी एकाग्रता से पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान बिना किसी चेतावनी के छत का एक बड़ा हिस्सा (प्लास्टर) सीधे बच्चों के ऊपर गिर गया।
छत से गिरे भारी मलबे की चपेट में आने से पहली कक्षा की छात्रा प्रियांशी कोरकू (उम्र 6 वर्ष) के सिर पर गंभीर चोट आ गई। सिर से खून बहता देख क्लास में मौजूद अन्य बच्चे सहम गए और स्कूल में चीख-पुकार मच गई। शिक्षकों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए अन्य बच्चों को कमरे से बाहर निकाला और घायल प्रियांशी को संभाला।
जिला अस्पताल में उपचार जारी, हालत खतरे से बाहर
हादसे के फौरन बाद घायल छात्रा प्रियांशी को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी क्षेत्र सोनतलाई ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के बाद बेहतर और सघन उपचार के लिए उसे तत्काल हरदा जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वर्तमान में जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में मासूम प्रियांशी का उपचार जारी है, जहाँ उसकी स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
पंचायत भवन में शिफ्ट होगा स्कूल, डीईओ ने दिए निर्देश
शासकीय स्कूल में हुए इस हादसे की सूचना मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डी.एस. रघुवंशी तत्काल प्रशासनिक अमले के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने दुर्घटनाग्रस्त क्लासरूम का बारीकी से निरीक्षण किया और भवन की स्थिति का जायजा लिया। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए डीईओ ने संबंधित शिक्षकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि आगामी आदेश तक स्कूल का संचालन इस जर्जर कमरे में बिल्कुल न किया जाए, बल्कि अस्थाई रूप से स्कूल को ग्राम पंचायत भवन में लगाया जाए।
बुनियादी ढांचे पर उठे सवाल: डीईओ बोले— ‘देखने से जर्जर नहीं लग रहा था’
इस संवेदनशील मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी डी.एस. रघुवंशी ने अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए कहा: “बालिका को छत का प्लास्टर गिरने के कारण मामूली चोटें आई हैं, जिसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए हरदा जिला अस्पताल भिजवा दिया गया था। राहत की बात यह है कि बच्ची अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। जिले में हमारी नीति स्पष्ट है कि किसी भी जर्जर भवन में कक्षाएं नहीं लगाई जा रही हैं। जिस कमरे का प्लास्टर गिरा है, वह भी देखने से कहीं से भी जर्जर या कमजोर प्रतीत नहीं हो रहा था। फिर भी, यह हादसा कैसे हुआ, इसकी तकनीकी जांच कराई जा रही है।”
स्कूल सेफ्टी ऑडिट की उठने लगी मांग
डीईओ भले ही इस भवन को देखने में मजबूत बता रहे हों, लेकिन इस हादसे ने मानसून के मौसम में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और उनकी मजबूती के दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि प्लास्टर का वह भारी टुकड़ा किसी बच्चे के सिर के संवेदनशील हिस्से पर सीधे गिरता, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। इस घटना के बाद अब जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पुराने स्कूल भवनों का नए सिरे से ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराने की मांग तेज होने लगी है, ताकि भविष्य में मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ ऐसा खिलवाड़ दोबारा न हो।







