‘सलवार उतारना, ब्रेस्ट दबाना रेप की कोशिश नहीं?’ पटना HC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लगाई फटकार

Patna High Court Verdict: Patna High Court Verdict को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करते समय न्यायाधीशों को अधिक संवेदनशीलता, गहन कानूनी अध्ययन और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पर्याप्त विचार-विमर्श जरूरी है।

Patna High Court Verdict उस टिप्पणी के बाद चर्चा में आया, जिसमें पटना हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी महिला का सलवार उतारने की कोशिश करना और उसके सीने को दबाना अपने आप में दुष्कर्म के प्रयास का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे महिला की गरिमा भंग करने से जुड़ा अपराध माना था।इस टिप्पणी के सार्वजनिक होने के बाद देशभर में व्यापक बहस शुरू हो गई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
Patna High Court Verdict पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक अधिकारियों को अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अदालत ने कहा कि किसी भी फैसले से पहले पर्याप्त कानूनी शोध, पूर्व के महत्वपूर्ण फैसलों का अध्ययन और स्थापित दिशा-निर्देशों का पालन आवश्यक है।सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी चिंता जताई कि कुछ मामलों में पर्याप्त शोध के अभाव में ऐसे फैसले सामने आते हैं, जो विवाद का कारण बनते हैं।
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क्या है पूरा मामला?
Patna High Court Verdict वर्ष 2008 की एक घटना से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, एक युवती अपने पिता के साथ एक फोटो स्टूडियो गई थी। आरोप है कि स्टूडियो संचालक ने युवती को कमरे में बंद कर उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की।इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास का दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। बाद में पटना हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि उपलब्ध सबूत दुष्कर्म के प्रयास का अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि अदालत ने आरोपी के कृत्य को महिला की गरिमा भंग करने वाला अपराध माना।

पहले के फैसलों का भी रखा जिक्र
Patna High Court Verdict पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले भी यौन अपराधों से जुड़े कुछ फैसलों पर विवाद हो चुका है। इसलिए सभी अदालतों को ऐसे मामलों में पहले से जारी दिशा-निर्देशों और संवेदनशीलता संबंधी हैंडबुक का पालन करना चाहिए।

भविष्य के लिए क्या संदेश?
Patna High Court Verdict पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी केवल एक मामले तक सीमित नहीं मानी जा रही है। अदालत ने संकेत दिया कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान संवेदनशीलता, कानूनी अध्ययन और स्थापित न्यायिक मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि ऐसे मामलों में न्याय के प्रति लोगों का विश्वास भी बना रहेगा।

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