MP Crime: रीवा में पति के शव के टुकड़े सिलेंडर में भरने का दावा! पुलिस ने बताया पूरा सच

Rahul Goshwami

Rewa Viral Fake Video: रीवा वायरल फेक वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों के बीच भ्रम और डर का माहौल बना दिया। वीडियो में दावा किया जा रहा था कि मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक महिला ने अपने पति की हत्या कर शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एलपीजी सिलेंडर के अंदर छिपा दिया। हालांकि पुलिस की जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक निकला।

सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किए जा रहे रीवा वायरल फेक वीडियो में बेहद सनसनीखेज दावा किया गया था। वीडियो के साथ यह कहा जा रहा था कि महिला ने कुल्हाड़ी से पति की हत्या कर शव के टुकड़े गैस सिलेंडर में भर दिए। दावा वायरल होते ही लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

पुलिस जांच में सामने आई सच्चाई
रीवा वायरल फेक वीडियो की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो का रीवा जिले से कोई संबंध नहीं है। पुलिस के अनुसार जिले में इस तरह की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है और वायरल किया जा रहा दावा पूरी तरह गलत है।
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रीवा पुलिस ने अफवाहों पर लगाया विराम
रीवा के सीएसपी राजीव पाठक ने बताया कि रीवा वायरल फेक वीडियो को जिले का बताकर फैलाया जा रहा है, जबकि यह पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस के रिकॉर्ड में ऐसी कोई घटना नहीं है और लोगों को अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

बिना पुष्टि वीडियो शेयर न करने की अपील
पुलिस ने रीवा वायरल फेक वीडियो के मामले में लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या खबर को बिना सत्यापन सोशल मीडिया पर साझा न करें। इस तरह की भ्रामक सामग्री लोगों में डर और भ्रम फैलाती है तथा कानून-व्यवस्था पर भी असर डाल सकती है।

फर्जी सामग्री फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
रीवा पुलिस ने साफ कहा है कि रीवा वायरल फेक वीडियो जैसे भ्रामक पोस्ट साझा करने वालों पर नजर रखी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर फर्जी जानकारी फैलाता पाया गया तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अफवाहों से रहें सावधान
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी सनसनीखेज वीडियो या संदेश पर तुरंत विश्वास न करें। रीवा वायरल फेक वीडियो का मामला इस बात का उदाहरण है कि बिना पुष्टि की गई जानकारी किस तरह भ्रम फैला सकती है। ऐसे मामलों में केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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