New Delhi Village Water Crisis: नई दिल्ली गांव जल संकट एक बार फिर चर्चा में है। नाम भले ही देश की राजधानी जैसा हो, लेकिन मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले का यह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी परेशानी पीने का पानी है। हालात ऐसे हैं कि हर दिन ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर 100 फीट गहरी खाई में उतरना पड़ता है। वर्षों से चल रही यह समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है।
मऊगंज जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में सैकड़ों परिवार रहते हैं। नई दिल्ली गांव जल संकट के कारण यहां हर सुबह पानी जुटाने की जद्दोजहद से शुरू होती है। गांव में नियमित पेयजल व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग पहाड़ियों के बीच स्थित प्राकृतिक झरने पर निर्भर हैं। यही झरना पूरे गांव की जरूरतें पूरी करता है।
महिलाओं और बच्चों की रोज की कठिन परीक्षा
नई दिल्ली गांव जल संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर दिखाई देता है। सुबह होते ही वे सिर पर खाली बर्तन लेकर खतरनाक रास्तों से नीचे उतरते हैं। पानी भरने के बाद भारी मटकों के साथ फिसलन भरे रास्ते पर चढ़ाई करना बेहद मुश्किल होता है। ग्रामीणों का कहना है कि एक छोटी सी गलती जानलेवा साबित हो सकती है।
Read more: MP News: सिर्फ हॉर्न बजाया और चल गई गोलियां! भोपाल पार्किंग विवाद ने लिया खूनी मोड़
एक ही झरने पर टिकी पूरे गांव की जिंदगी
नई दिल्ली गांव जल संकट इसलिए भी गंभीर है क्योंकि गांव में पीने, खाना बनाने, नहाने और अन्य घरेलू कामों के लिए सिर्फ एक प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद है। इसी झरने से मवेशी भी पानी पीते हैं और जंगल से आने वाले जंगली जानवर भी अपनी प्यास बुझाते हैं। इससे पानी की गुणवत्ता को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है।
सरकारी योजनाएं पहुंचीं, लेकिन पानी नहीं पहुंचा
ग्रामीणों का कहना है कि नई दिल्ली गांव जल संकट खत्म करने के लिए वर्षों पहले गांव में नल लगाए गए थे, लेकिन उनमें कभी पानी नहीं आया। जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं के दावे यहां धरातल पर दिखाई नहीं देते। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय केवल आश्वासन मिलते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हुआ।
पर्यटक देखते हैं झरने, ग्रामीण तलाशते हैं पीने का पानी
नई दिल्ली गांव जल संकट की विडंबना यह है कि गांव मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बहुती जलप्रपात के पास स्थित है। हर साल हजारों पर्यटक यहां प्राकृतिक सुंदरता देखने आते हैं, लेकिन इसी इलाके के ग्रामीण पीने के पानी के लिए संघर्ष करते हैं। जहां पर्यटक तस्वीरें लेते हैं, वहीं गांव की महिलाएं उसी क्षेत्र में अपनी जान जोखिम में डालकर पानी भरती हैं।
बारिश में और बढ़ जाती है परेशानी
बरसात के मौसम में नई दिल्ली गांव जल संकट और गंभीर हो जाता है। झरने का पानी गंदा हो जाता है और आसपास की मिट्टी व गंदगी उसमें मिल जाती है। इसके बावजूद ग्रामीणों के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। फिसलन के कारण हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्रामीणों के अनुसार कई लोग पानी भरने के दौरान घायल हो चुके हैं।
दूषित पानी से बढ़ रहा बीमारियों का खतरा
ग्रामीणों का दावा है कि नई दिल्ली गांव जल संकट के कारण दूषित पानी पीने से कई लोग पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों से परेशान हुए हैं। इलाज के लिए उन्हें आसपास के शहरों तक जाना पड़ता है। स्वास्थ्य संबंधी जोखिम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था अब भी नहीं हो सकी है।
40 साल से इंतजार, अब भी समाधान अधूरा
ग्रामीणों का कहना है कि नई दिल्ली गांव जल संकट को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। चार दशक बीत जाने के बाद भी गांव की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
अब सबसे बड़ा सवाल
जब सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, तब नई दिल्ली गांव जल संकट आखिर कब खत्म होगा? क्या इस गांव के लोगों को भी सुरक्षित पानी मिलेगा, या आने वाली पीढ़ियां भी इसी तरह 100 फीट गहरी खाई में उतरकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर रहेंगी? अब सभी की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।







