MP BEd Teachers: बीएड शिक्षकों की रुकी सैलरी से बढ़ी टेंशन, 10 महीने बाद भी ब्रिज कोर्स का पता नहीं

MP BEd Teachers Salary: एमपी बीएड शिक्षक सैलरी को लेकर प्रदेश के हजारों प्राथमिक शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बीएडधारी शिक्षकों का कहना है कि कई जिलों में उनका वेतन रोक दिया गया है, जबकि कुछ जिलों में उसी श्रेणी के शिक्षकों को नियमित वेतन मिल रहा है। इसके साथ ही ब्रिज कोर्स के लिए फीस जमा कराने के करीब 10 महीने बाद भी कोर्स शुरू नहीं हो सका है। शिक्षकों का कहना है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, फिर भी उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एमपी बीएड शिक्षक सैलरी को लेकर शिक्षकों का आरोप है कि प्रदेश में एक जैसी नियुक्ति और समान जिम्मेदारियां होने के बावजूद अलग-अलग जिलों में अलग नियम लागू किए जा रहे हैं। कुछ जिलों में शिक्षकों को पूरा वेतन दिया जा रहा है, जबकि कई जिलों में उनका वेतन रोक दिया गया है। इससे प्रभावित शिक्षकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

एमपी बीएड शिक्षक सैलरी: 25 हजार रुपये जमा, फिर भी नहीं शुरू हुआ ब्रिज कोर्स
एमपी बीएड शिक्षक सैलरी विवाद के साथ ब्रिज कोर्स का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। शिक्षकों के अनुसार प्रदेश के 10,579 बीएडधारी शिक्षकों से ब्रिज कोर्स के लिए 25-25 हजार रुपये शुल्क लिया गया। इनमें 10,521 शिक्षकों के आवेदन राज्य स्तर पर मंजूर भी हो चुके हैं, लेकिन करीब 10 महीने बीतने के बाद भी ब्रिज कोर्स शुरू नहीं किया गया। इससे शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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एमपी बीएड शिक्षक सैलरी: पढ़ाई के साथ सरकारी जिम्मेदारियां भी निभा रहे शिक्षक
एमपी बीएड शिक्षक सैलरी से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि वे नियमित रूप से स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा चुनाव, जनगणना और शिक्षा विभाग की ओर से सौंपे गए अन्य सरकारी कार्य भी पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं। इसके बावजूद कई जिलों में उनका प्रोबेशन पीरियड बढ़ाया जा रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

एमपी बीएड शिक्षक सैलरी: शिक्षकों ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
एमपी बीएड शिक्षक सैलरी मामले में शिक्षकों ने सरकार से कई मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि सभी बीएडधारी प्राथमिक शिक्षकों का 100 प्रतिशत वेतन तुरंत जारी किया जाए। प्रोबेशन अवधि बढ़ाने का फैसला वापस लिया जाए। ब्रिज कोर्स जल्द शुरू कर उसकी समय-सीमा घोषित की जाए। साथ ही पूरे प्रदेश में सभी जिलों के लिए एक समान आदेश लागू किया जाए, ताकि किसी भी शिक्षक के साथ अलग व्यवहार न हो।

एमपी बीएड शिक्षक सैलरी: देरी का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए
एमपी बीएड शिक्षक सैलरी को लेकर शिक्षकों का कहना है कि ब्रिज कोर्स शुरू कराने की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय, एनसीटीई (NCTE) और एनआईओएस (NIOS) की है। यदि संबंधित संस्थाओं की ओर से प्रक्रिया में देरी हुई है तो इसका असर शिक्षकों के वेतन और सेवा शर्तों पर नहीं पड़ना चाहिए। शिक्षकों ने मध्य प्रदेश सरकार, शिक्षा मंत्रालय, NCTE और NIOS से इस पूरे मामले में जल्द निर्णय लेने और स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला केवल हजारों शिक्षकों का ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

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