Tuesday, August 25, 2026
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IPS P. Sundarraj ने NIA में संभाला IG का पदभार, कहा- राह नई पर सेवा का संकल्प वही

IPS P. Sundarraj: नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ और बेहद काबिल आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के इंस्पेक्टर जनरल (IG) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। वर्ष 2003 बैच के इस जांबाज पुलिस अधिकारी ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपनी इस नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार किया है। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर देश की जनता और अपने सहयोगियों के लिए एक बेहद भावुक और गरिमापूर्ण संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है।

नए दायित्व के साथ देश सेवा का दृढ़ संकल्प

आईपीएस पी. सुंदरराज ने अपनी इस नई यात्रा की शुरुआत करते हुए लिखा, “राह नई है, लेकिन सेवा का संकल्प वही है। आप सभी का स्नेह और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति और प्रेरणा है।” उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी में महानिरीक्षक के रूप में कार्यभार संभालने के ऐतिहासिक अवसर पर अपने अब तक के सेवाकाल को याद किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में बिताए अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान मिले निरंतर सहयोग, शुभकामनाओं, वरिष्ठों के मार्गदर्शन, सहकर्मियों की मित्रता और संचित अनुभवों के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने विश्वास जताया कि ये तमाम समृद्ध अनुभव उनके इस नए और चुनौतीपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व के निर्वहन में भी मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।

बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का प्रमुख चेहरा

आईपीएस पी. सुंदरराज की पहचान देश के सबसे प्रभावी और रणनीतिक पुलिस कप्तानों में होती है। वे लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के अत्यंत संवेदनशील बस्तर रेंज के आईजी रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के उन दुर्गम, बीहड़ और घने नक्सल प्रभावित इलाकों में निरंतर ऑपरेशन्स चलाए, जिन्हें कभी माओवादियों का अभेद्य किला माना जाता था। उनकी कड़क और सटीक रणनीति के चलते माओवादी संगठनों के पैर उखड़ गए और उनके नेटवर्क को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा। बस्तर में शांति बहाली की दिशा में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता है।

केवल हथियार नहीं, विकासपरक रणनीति से जीती बाजी

पी. सुंदरराज की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वे केवल सशस्त्र कार्रवाई पर निर्भर नहीं रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ट्राइबल इलाकों में चौतरफा विकास की नीति अपनाई। उन्होंने पुलिस के खुफिया तंत्र (Intelligence Network) को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय आदिवासी युवाओं को सुरक्षा अभियानों से जोड़ने और उनका भरोसा जीतने का सफल प्रयास किया।

अबूझमाड़ जैसे अत्यंत संवेदनशील और पहुंचविहीन क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित कर सुरक्षा बलों की पैठ बढ़ाना उनकी बड़ी कामयाबी मानी जाती है। उन्होंने अंदरूनी इलाकों में सड़क निर्माण, पुल-पुलियों के विकास और बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के काम को सुरक्षा कवच प्रदान किया। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि विकासपरक सोच और सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव को देखकर बड़ी संख्या में सक्रिय माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा में शामिल हुए।

बस्तर की धरती पर अपनी बहादुरी और सूझबूझ का लोहा मनवाने के बाद, अब आईपीएस पी. सुंदरराज देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने वाली सर्वोच्च एजेंसी एनआईए में अपनी सेवाएं देने पहुंचे हैं। आतंकवाद, टेरर फंडिंग और गंभीर राष्ट्रीय अपराधों की जांच करने वाली इस महत्वपूर्ण एजेंसी में उनकी तैनाती से निश्चित तौर पर जांच के स्तर और आतंकवाद विरोधी अभियानों को एक नई धार मिलेगी। आतंकवाद और देश विरोधी ताकतों के खिलाफ लड़ाई में उनका यह नया सफर बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।

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