Thursday, August 20, 2026
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CG Teejan Bai Death: पंडवानी की गूंज हुई मौन पद्म विभूषण तीजन बाई नहीं रहीं, 13 साल की उम्र से शुरू हुआ था लोककला का स्वर्णिम सफर

CG Teejan Bai Death: रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की सबसे सशक्त आवाज और पंडवानी गायन को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने रायपुर एम्स में 70 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ भारतीय लोककला का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। दशकों तक अपनी बुलंद आवाज, जीवंत अभिनय और अद्वितीय शैली से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुंचाने वाली तीजन बाई अब केवल अपनी अमर विरासत के रूप में याद की जाएंगी।

रविवार सुबह उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। गांव का हर चेहरा गमगीन था और अपने बीच की महान लोक कलाकार को अंतिम विदाई देने लोगों की आंखें नम थीं।

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नाना की कहानियों से मिली जीवन की दिशा

CG Teejan Bai Death: तीजन बाई का बचपन साधारण परिवार में बीता, लेकिन उनके सपने असाधारण थे। बचपन में वे अपने नाना से महाभारत की कथाएं सुना करती थीं। यही कथाएं उनके जीवन का आधार बनीं और उन्होंने पंडवानी गायन को अपना जीवन समर्पित कर दिया।

महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी की प्रस्तुति दी। उस दौर में महिलाओं का इस लोककला में मंच पर आना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने सामाजिक बंधनों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।

गांव की चौपाल से दुनिया के मंच तक

CG Teejan Bai Death: तीजन बाई ने पंडवानी को केवल लोकगायन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी अभिनय शैली, संवाद और सशक्त अभिव्यक्ति से उसे एक जीवंत मंचीय कला का रूप दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में लोगों को भारतीय लोकसंस्कृति से परिचित कराया। वे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं।

देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित

CG Teejan Bai Death: भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख
CG Teejan Bai Death: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनका जाना भारतीय कला और संस्कृति जगत की अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले— छत्तीसगढ़ ने अपनी अमूल्य धरोहर खो दी

CG Teejan Bai Death: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजन बाई ने अपने जीवन को लोककला के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने जिस समर्पण से पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वह हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा।

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भूपेश बघेल ने साझा की यादें

CG Teejan Bai Death: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अंतिम संस्कार में शामिल होने गनियारी पहुंचे। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में वे साइकिल चलाकर कई किलोमीटर दूर केवल तीजन बाई की पंडवानी सुनने जाते थे। उन्होंने कहा कि तीजन बाई केवल कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा थीं।

हमेशा जिंदा रहेगी उनकी आवाज

CG Teejan Bai Death: डॉ. तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनकी कला और उनकी साधना हमेशा जीवित रहेगी। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के दम पर गांव की चौपाल से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है। भारतीय लोककला के इतिहास में उनका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।

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