Jatamai Waterfall Gariaband: गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुप्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल जतमई देवी मंदिर परिसर का जलप्रपात बीती रात हुई मूसलाधार और लगातार बारिश के बाद एक बार फिर अपने पूरे शबाब पर लौट आया है। मानसून की इस जोरदार आमद के चलते जलप्रपात में पानी का तेज बहाव शुरू हो गया है, जिससे जतमई और इसके आसपास फैले घने जंगलों का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बन रहा है। भीषण गर्मी के कारण लंबे समय से सूखे पड़े पहाड़ी झरने विधिक रूप से फिर से जीवंत हो उठे हैं और पूरी वादियां मनोरम हरियाली की चादर से सराबोर हो गई हैं।
रविवार और अवकाश के दिन उमड़ा पर्यटकों का सैलाब
आज रविवार और साप्ताहिक अवकाश का दिन होने के कारण राजधानी रायपुर सहित देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पर्यटक जतमई पहुंच रहे हैं। क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही खुशनुमा बारिश के बीच लोग मुख्य झरने के नीचे पहुंचकर भीगते हुए सुहावने मौसम और अद्भुत प्राकृतिक नजारों का जमकर आनंद ले रहे हैं।
बिना पहरे के फिसलन भरे रास्तों पर सैलानी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
एक तरफ जहां प्राकृतिक दृश्य सैलानियों को अपनी ओर खींच रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर विधिक और व्यावहारिक सवाल खड़े हो गए हैं। जलप्रपात पर उमड़ती इस भारी भीड़ के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक सुरक्षा के कोई पर्याप्त या पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
मौके पर विसंगतिपूर्ण स्थिति यह है कि जलप्रपात के बेहद संवेदनशील और ऊंचे हिस्सों के आसपास न तो कोई प्रशासनिक चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही किसी सुरक्षाकर्मी या गोताखोरों की तैनाती की गई है। इसके चलते कई बेपरवाह पर्यटक बिना किसी रोक-टोक और विधिक अनुशासन के झरने के बेहद फिसलन भरे पथरीले रास्तों और गहरे पानी के संवेदनशील क्षेत्रों में घूमते हुए सेल्फी ले रहे हैं, जिससे पैर फिसलने या कोई बड़ा हादसा होने की आशंका लगातार बनी हुई है।
स्थानीय ग्रामीणों ने की सुरक्षा पुख्ता करने की मांग
जतमई के स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग से पुरजोर विधिक मांग की है कि यहां आने वाले पर्यटकों की जानमाल की सुरक्षा को देखते हुए जल्द से जल्द आवश्यक और कड़े इंतजाम किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य डेंजर जोन की बैरिकेडिंग की जाए और सुरक्षा गार्डों की तैनाती तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाने पहुंचे लोग सुरक्षित अपने घरों को लौट सकें।







