Padma Vibhushan Teejan Bai Death: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के लिए बेहद दुखद खबर है। पंडवानी गायन को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली महान कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई ने देर रात रायपुर एम्स में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में शोक की लहर फैल गई। कला जगत से जुड़े लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति की बड़ी क्षति बताया है।
पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन उस कलाकार का अंत है, जिसने बहुत कम उम्र में अपनी अलग पहचान बना ली थी। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पंडवानी गायन शुरू किया। अपनी दमदार आवाज, अनोखी प्रस्तुति और अभिनय शैली के कारण उन्होंने जल्द ही लोगों का दिल जीत लिया। गांव के छोटे मंचों से शुरू हुआ उनका सफर देश और विदेश तक पहुंचा।
पंडवानी को दिलाई नई पहचान
पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी विरासत का खोना है जिसने पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने महाभारत की कहानियों को अपने खास अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में गायन के साथ अभिनय और भावों का ऐसा मेल होता था कि दर्शक पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो जाते थे।
कई बड़े सम्मानों से हुई थीं सम्मानित
पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन ऐसे समय हुआ है जब उनकी कला आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी हुई है। उनके लंबे योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले।
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रायपुर एम्स में चल रहा था इलाज
पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन से पहले उनका कुछ समय से स्वास्थ्य ठीक नहीं था। उन्हें इलाज के लिए रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की लगातार कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। देर रात उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में कलाकारों, प्रशंसकों और शुभचिंतकों ने शोक व्यक्त किया।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान थीं तीजन बाई
पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवनभर लोककला को आगे बढ़ाने का काम किया। उनकी वजह से पंडवानी को देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई मंचों पर सम्मान मिला। आज भी उनकी प्रस्तुतियों को लोककला की मिसाल माना जाता है।
नई पीढ़ी के लिए रहेंगी प्रेरणा
पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन के बाद भी उनकी आवाज और उनकी कला हमेशा जीवित रहेगी। उन्होंने यह साबित किया कि मेहनत, प्रतिभा और समर्पण से किसी भी लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा लेती रहेंगी।
देशभर में शोक, श्रद्धांजलि का दौर
पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन की खबर के बाद सांस्कृतिक संस्थाओं, कलाकारों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। हर कोई उन्हें भारतीय लोककला की सबसे मजबूत आवाज और पंडवानी की सबसे बड़ी पहचान के रूप में याद कर रहा है। उनके जाने से भारतीय सांस्कृतिक जगत में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है जिसे भर पाना बेहद मुश्किल होगा।







