Rajya Sabha Number Game 2026: उच्च सदन में बढ़ा एनडीए का कद, जानिए अब विपक्षी खेमे के पास बची कितनी सीटें

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Rajya Sabha Number Game 2026: नई दिल्ली: 10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर हुए हालिया चुनाव और राजनीतिक उठापटक के बाद संसद के उच्च सदन (Rajya Sabha) में नंबर गेम पूरी तरह बदल गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) अब राज्यसभा में भी अभूतपूर्व रूप से शक्तिशाली होकर उभरा है। ताजा चुनावी नतीजों और रणनीतिक फेरबदल के बाद एनडीए का आंकड़ा 152 सीटों तक पहुंच गया है, जो दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े से महज 11 सीटें दूर है। दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन को करारा झटका लगा है और वह घटकर सिर्फ 64 सांसदों पर सिमट गया है।

निर्विरोध निर्वाचन और झारखंड की जीत से बढ़ा ग्राफ

इस चुनावी चक्र में सबसे पहले विभिन्न राज्यों से 24 सांसद निर्विरोध चुने गए थे, जिनमें से अकेले 19 सांसद एनडीए खेमे के थे। इसके बाद झारखंड में हुई वोटिंग में परिमल नथवानी की महत्वपूर्ण जीत ने गुरुवार को एनडीए के सांसदों की संख्या को 152 के स्तर पर पहुंचा दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक सफलता के बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार बागी सांसदों— सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर भी बीजेपी आसानी से कब्जा जमा लेगी, जिससे यह आंकड़ा और मजबूत होगा।

गैर-गठबंधन दलों की भूमिका और परिसीमन बिल की राह

सदन में अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्रीय दल मौजूद हैं जो किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का साथ देते रहे हैं। इनमें वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के 7 और बीजू जनता दल (BJD) के 5 सांसद शामिल हैं। हालांकि, ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजेडी और बीजेपी के संबंधों में नया मोड़ देखा जा रहा है। गौरतलब है कि संविधान संशोधन विधेयकों को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। यदि एनडीए आगामी दिनों में 11 और सीटें जुटाकर यह आंकड़ा पा लेता है, तो मोदी सरकार के लिए देश में बहुप्रतीक्षित ‘परिसीमन बिल’ (Delimitation Bill) को आगामी मॉनसून सत्र में पास कराना बेहद आसान हो जाएगा।

‘इंडिया’ गठबंधन में बिखराव, लोकसभा में भी दिखेगा असर

कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ताकत कम होने का मुख्य कारण आंतरिक बिखराव है। 8 सांसदों वाली द्रमुक (DMK) और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (AAP) के इस समूह से अलग होने के कारण विपक्ष की संख्या 64 पर आकर टिक गई है। उच्च सदन के साथ-साथ इसका असर निचले सदन में भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि अटकलें हैं कि टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसद एक अलग गुट बनाकर एनडीए सरकार को समर्थन दे सकते हैं, जिससे लोकसभा में भी एनडीए की संख्या 300 के पार जा सकती है।

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