UPI Payments: टिकट बुकिंग और शॉपिंग के बाद एआई संभालेंगे आपका बैंक अकाउंट, जानिए कैसे काम करेगी तकनीक

VIKASH KHALKHO

UPI Payments: आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में अब एक नया और बेहद क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। एआई अब सिर्फ गूगल या चैटबॉट्स पर आपके पूछे गए सवालों के जवाब देने तक ही सीमित नहीं रह गई है। एआई चैटबॉट के शुरुआती दौर के बाद अब वैश्विक बाजार में ‘एआई एजेंट्स’ का नया दौर आ गया है, जो न सिर्फ आपकी बात को समझते हैं बल्कि आपके सौंपे गए कठिन टास्क को भी पूरा कर सकते हैं। ये एडवांस एआई एजेंट्स अब आपकी ऑनलाइन ट्रिप की पूरी प्लानिंग करने, शॉपिंग करने और टिकट बुकिंग तक का सारा काम खुद कर सकते हैं। आपको बस एक साधारण वॉयस या टेक्स्ट कमांड के जरिए इन्हें अपनी जरूरत बतानी होती है। इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा ऑनलाइन पेमेंट को लेकर आ रही थी, जिसे अब पूरी तरह से दूर कर लिया गया है। शॉपिंग और बुकिंग के साथ-साथ अब ये एआई एजेंट्स सीधे यूपीआई (UPI) पेमेंट भी कर सकेंगे।UPI Payments in India: A Comprehensive Guide for Foreigners and Digital  Nomads - NomadGao

रीजनिंग और मेमोरी क्षमता से लैस होते हैं एआई एजेंट्स

आमतौर पर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि साधारण एआई और एआई एजेंट्स में क्या अंतर होता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, एआई एजेंट्स ऐसे बेहद उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं, जो यूजर की सिंगल कमांड पर जटिल से जटिल टास्क को अपने स्तर पर पूरा करने की क्षमता रखते हैं। इन एजेंट्स के भीतर रीजनिंग (तर्क करने की क्षमता), विस्तृत प्लानिंग और मजबूत मेमोरी की कैपेबिलिटीज इनबिल्ट होती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि ये एजेंट्स काम के दौरान खुद से गलतियों को सीखकर अपने फैसले खुद लेने में सक्षम होते हैं। कंप्यूटर और मोबाइल में इस्तेमाल होने वाले कुछ एआई एजेंट्स जहां टिकट बुकिंग और ग्रॉसरी ऑर्डर करने के काम आते हैं, वहीं इन्हें रियल लाइफ में ऑटोमेटेड ड्रोन्स, रोबोट्स और बिना ड्राइवर के चलने वाली सेल्फ ड्राइविंग कारों के रूप में भी देखा जा सकता है।UPI Payments: Advantages and Disadvantages - Banking Things

बिना इंसानी ऑथेंटिकेशन के ऐसे होगा सुरक्षित भुगतान

अभी तक के डिजिटल नियमों के मुताबिक, एआई एजेंट्स को किसी भी प्रकार का ऑनलाइन पेमेंट पूरा करने से पहले इंसानी ऑथेंटिकेशन यानी यूजर के ओटीपी या पिन की जरूरत पड़ती थी। इस वजह से पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक नहीं हो पाती थी, लेकिन अब देश की जानी-मानी फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स ने इसका एक बेहद सटीक तकनीकी समाधान निकाल लिया है। कंपनी ने ‘पाइन लैब्स पेमेंट प्रोटोकॉल’ (P3P) नाम से एक नया और सुरक्षित सिस्टम तैयार किया है। यह सिस्टम एआई एजेंट को बिना किसी इंसानी दखल के सीधे भुगतान करने की विशेष सुविधा देगा। इस पूरे आर्किटेक्चर को सुरक्षित बनाने के लिए यूपीआई के ही मौजूदा पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर ‘यूपीआई वन टाइम मैंडेट्स’ (OTM) और ‘रिजर्व पे’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।India planning to bring 300 million new users onto UPI payments platform |  Finance News - Business Standard

फ्यूचर पेमेंट्स और रिजर्व पे सिस्टम का तालमेल

इस नई पेमेंट प्रणाली को बारीकी से समझने के लिए इसके दोनों स्तंभों को जानना जरूरी है। इसके तहत पहला सिस्टम ‘यूपीआई वन टाइम मैंडेट’ (OTM) काम करता है, जिसकी मदद से कोई भी यूजर अपने भविष्य में होने वाले भुगतानों को एडवांस में ही अपनी मंजूरी दे सकता है। यह तकनीक किसी भी एक सिंगल फ्यूचर ट्रांजेक्शन के लिए यूजर के बैंक अकाउंट में एक निश्चित रकम को पहले से ब्लॉक कर देती है। इसके विपरीत, दूसरा ‘रिजर्व पे’ सिस्टम है जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने खास तौर पर रिकरिंग (बार-बार होने वाले) और ऑटोमैटिक पेमेंट्स को ध्यान में रखकर डेवलप किया था। इस रिजर्व पे सिस्टम का इस्तेमाल मुख्य रूप से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स या अन्य सब्सक्रिप्शन बेस्ड डिजिटल सर्विसेज के बिल भुगतान के लिए किया जाता है।NPCI Introduces QR-Based UPI Payments For Overseas Delegates - Outlook Money

अकाउंट की सुरक्षा के लिए ग्रांटेक्स तकनीक का कवच

एआई को सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से पैसा काटने की अनुमति देने के बाद देश भर के उपभोक्ताओं के मन में यह बड़ा सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं यह ऑटोमैटिक सिस्टम उनका पूरा अकाउंट खाली तो नहीं कर देगा। इस जायज सुरक्षा चिंता को लेकर पाइन लैब्स का कहना है कि उन्होंने सिस्टम में ‘ग्रांटेक्स’ (Grantex) नाम का एक बेहद मजबूत सुरक्षा कवच जोड़ा है जो किसी भी प्रकार के वित्तीय फ्रॉड या अतिरिक्त खर्च को पूरी तरह से रोक देगा। यह ग्रांटेक्स तकनीक असल में एआई एजेंट के लिए एक डिजिटल आइडेंटिटी और परमिशन लेयर की तरह काम करती है। यूजर द्वारा तय की गई लिमिट के दायरे में रहकर ही एआई एजेंट पैसे खर्च कर पाएगा। इसके अलावा यह सिस्टम बैंक खाते से होने वाले हर छोटे-बड़े लेनदेन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड भी रखेगा।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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