UPI Payments: आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में अब एक नया और बेहद क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। एआई अब सिर्फ गूगल या चैटबॉट्स पर आपके पूछे गए सवालों के जवाब देने तक ही सीमित नहीं रह गई है। एआई चैटबॉट के शुरुआती दौर के बाद अब वैश्विक बाजार में ‘एआई एजेंट्स’ का नया दौर आ गया है, जो न सिर्फ आपकी बात को समझते हैं बल्कि आपके सौंपे गए कठिन टास्क को भी पूरा कर सकते हैं। ये एडवांस एआई एजेंट्स अब आपकी ऑनलाइन ट्रिप की पूरी प्लानिंग करने, शॉपिंग करने और टिकट बुकिंग तक का सारा काम खुद कर सकते हैं। आपको बस एक साधारण वॉयस या टेक्स्ट कमांड के जरिए इन्हें अपनी जरूरत बतानी होती है। इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा ऑनलाइन पेमेंट को लेकर आ रही थी, जिसे अब पूरी तरह से दूर कर लिया गया है। शॉपिंग और बुकिंग के साथ-साथ अब ये एआई एजेंट्स सीधे यूपीआई (UPI) पेमेंट भी कर सकेंगे।
रीजनिंग और मेमोरी क्षमता से लैस होते हैं एआई एजेंट्स
आमतौर पर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि साधारण एआई और एआई एजेंट्स में क्या अंतर होता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, एआई एजेंट्स ऐसे बेहद उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं, जो यूजर की सिंगल कमांड पर जटिल से जटिल टास्क को अपने स्तर पर पूरा करने की क्षमता रखते हैं। इन एजेंट्स के भीतर रीजनिंग (तर्क करने की क्षमता), विस्तृत प्लानिंग और मजबूत मेमोरी की कैपेबिलिटीज इनबिल्ट होती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि ये एजेंट्स काम के दौरान खुद से गलतियों को सीखकर अपने फैसले खुद लेने में सक्षम होते हैं। कंप्यूटर और मोबाइल में इस्तेमाल होने वाले कुछ एआई एजेंट्स जहां टिकट बुकिंग और ग्रॉसरी ऑर्डर करने के काम आते हैं, वहीं इन्हें रियल लाइफ में ऑटोमेटेड ड्रोन्स, रोबोट्स और बिना ड्राइवर के चलने वाली सेल्फ ड्राइविंग कारों के रूप में भी देखा जा सकता है।
बिना इंसानी ऑथेंटिकेशन के ऐसे होगा सुरक्षित भुगतान
अभी तक के डिजिटल नियमों के मुताबिक, एआई एजेंट्स को किसी भी प्रकार का ऑनलाइन पेमेंट पूरा करने से पहले इंसानी ऑथेंटिकेशन यानी यूजर के ओटीपी या पिन की जरूरत पड़ती थी। इस वजह से पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक नहीं हो पाती थी, लेकिन अब देश की जानी-मानी फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स ने इसका एक बेहद सटीक तकनीकी समाधान निकाल लिया है। कंपनी ने ‘पाइन लैब्स पेमेंट प्रोटोकॉल’ (P3P) नाम से एक नया और सुरक्षित सिस्टम तैयार किया है। यह सिस्टम एआई एजेंट को बिना किसी इंसानी दखल के सीधे भुगतान करने की विशेष सुविधा देगा। इस पूरे आर्किटेक्चर को सुरक्षित बनाने के लिए यूपीआई के ही मौजूदा पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर ‘यूपीआई वन टाइम मैंडेट्स’ (OTM) और ‘रिजर्व पे’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।)
फ्यूचर पेमेंट्स और रिजर्व पे सिस्टम का तालमेल
इस नई पेमेंट प्रणाली को बारीकी से समझने के लिए इसके दोनों स्तंभों को जानना जरूरी है। इसके तहत पहला सिस्टम ‘यूपीआई वन टाइम मैंडेट’ (OTM) काम करता है, जिसकी मदद से कोई भी यूजर अपने भविष्य में होने वाले भुगतानों को एडवांस में ही अपनी मंजूरी दे सकता है। यह तकनीक किसी भी एक सिंगल फ्यूचर ट्रांजेक्शन के लिए यूजर के बैंक अकाउंट में एक निश्चित रकम को पहले से ब्लॉक कर देती है। इसके विपरीत, दूसरा ‘रिजर्व पे’ सिस्टम है जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने खास तौर पर रिकरिंग (बार-बार होने वाले) और ऑटोमैटिक पेमेंट्स को ध्यान में रखकर डेवलप किया था। इस रिजर्व पे सिस्टम का इस्तेमाल मुख्य रूप से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स या अन्य सब्सक्रिप्शन बेस्ड डिजिटल सर्विसेज के बिल भुगतान के लिए किया जाता है।
अकाउंट की सुरक्षा के लिए ग्रांटेक्स तकनीक का कवच
एआई को सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से पैसा काटने की अनुमति देने के बाद देश भर के उपभोक्ताओं के मन में यह बड़ा सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं यह ऑटोमैटिक सिस्टम उनका पूरा अकाउंट खाली तो नहीं कर देगा। इस जायज सुरक्षा चिंता को लेकर पाइन लैब्स का कहना है कि उन्होंने सिस्टम में ‘ग्रांटेक्स’ (Grantex) नाम का एक बेहद मजबूत सुरक्षा कवच जोड़ा है जो किसी भी प्रकार के वित्तीय फ्रॉड या अतिरिक्त खर्च को पूरी तरह से रोक देगा। यह ग्रांटेक्स तकनीक असल में एआई एजेंट के लिए एक डिजिटल आइडेंटिटी और परमिशन लेयर की तरह काम करती है। यूजर द्वारा तय की गई लिमिट के दायरे में रहकर ही एआई एजेंट पैसे खर्च कर पाएगा। इसके अलावा यह सिस्टम बैंक खाते से होने वाले हर छोटे-बड़े लेनदेन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड भी रखेगा।









