Lailunga Illegal Brick Kiln: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। रायगढ़ जिले के विकासखंड लैलूंगा क्षेत्र से पर्यावरण और सरकारी नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखाने का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इन दिनों समूचे लैलूंगा अंचल में लाल ईंट निर्माण के नाम पर प्रकृति, कानून और भविष्य तीनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना किसी वैध लाइसेंस और प्रशासनिक अनुमति के धड़ल्ले से संचालित हो रहे ईंट भट्टों की आग में जहां एक ओर बहुमूल्य जंगलों की हरियाली स्वाहा हो रही है, वहीं दूसरी ओर उपजाऊ कृषि भूमि का कई फीट गहरा अवैध उत्खनन कर धरती का सीना छलनी किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर विषय की पूरी जानकारी होने के बावजूद स्थानीय राजस्व विभाग, वन विभाग, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है।
पेड़ों को काटकर भट्टों में झोंक रहे माफिया, वन अमला मौन
स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ईंट पकाने के लिए आवश्यक ईंधन की भारी जरूरत को पूरा करने के लिए भू-माफिया आसपास के सुरक्षित जंगलों पर लगातार हमला कर रहे हैं। हरे-भरे कीमती वृक्षों को बेरहमी से काटकर इन भट्टों में अवैध रूप से झोंका जा रहा है, जिससे क्षेत्र की वन संपदा को ऐसी क्षति पहुँच रही है जिसकी भरपाई नामुमकिन है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन ट्रैक्टरों और गाड़ियों के माध्यम से वनों से लकड़ियों की अवैध ढुलाई की जाती है, लेकिन वन विभाग का मैदानी अमला कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति और औपचारिकता निभाकर शांत बैठ जाता है। खनिज और संबंधित विभागों के बड़े अधिकारी क्षेत्र का दौरा करना भी उचित नहीं समझते।
केंद्र सरकार की ३०० किमी के दायरे वाली अधिसूचना का खुला उल्लंघन
मामले की तकनीकी गंभीरता को देखें तो भारत सरकार द्वारा राजपत्र में प्रकाशित पर्यावरण मंत्रालय की कड़ी अधिसूचना के अनुसार, किसी भी ताप विद्युत संयंत्र (थर्मल पावर प्लांट) के ३०० किलोमीटर के दायरे में आने वाली उपजाऊ कृषि भूमि की मिट्टी का उपयोग करके लाल ईंट के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद लैलूंगा क्षेत्र में खुलेआम खेतों को खोदकर मिट्टी निकाली जा रही है। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति पूरी तरह नष्ट हो रही है, जिससे भविष्य में धान और अन्य फसलों के उत्पादन पर भयंकर विपरीत असर पड़ना तय है। किसानों का कहना है कि जहां राज्य सरकार उन्नत खेती को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं जमीनी स्तर पर कृषि भूमि का विनाश बेखौफ जारी है।
प्रशासनिक संरक्षण और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से जनता में भारी रोष
पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यदि समय रहते इन अवैध ईंट भट्टों पर तालाबंदी और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। भू-क्षरण, भूजल स्तर में भारी गिरावट और वायु प्रदूषण जैसी विकराल समस्याएं लैलूंगा को अपनी चपेट में ले लेंगी। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि बिना प्रशासनिक व विभागीय संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर यह काला खेल संभव नहीं है। इसके साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों की रहस्यमयी खामोशी भी लोगों को खटक रही है। लैलूंगा की जागरूक जनता अब इस पर्यावरणीय अपराध के खिलाफ जिम्मेदार विभागों से त्वरित और निष्पक्ष जांच कर मुख्य दोषियों को जेल भेजने की मांग कर रही है।









