Narmadapuram Rural Tourism: नर्मदापुरम। सरकारी दफ्तरों की बैठकों, भारी-भरकम फाइलों और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के बीच व्यस्त रहने वाले जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का एक बेहद अनूठा और आत्मीय रूप सामने आया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सोहागपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से सुंदर गांव छेंडका में वह अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां जिले के प्रशासनिक मुखिया और पुलिस कप्तान गांव की चौपाल, कच्ची पगडंडियों, बैलगाड़ी और पारंपरिक ग्रामीण खेलों के बीच रमे नजर आए। दरअसल, यह वाकया मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की ‘ग्रामीण पर्यटन परियोजना’ के तहत आयोजित एक विशेष प्रवास का है, जिसने अफसरशाही और आम ग्रामीणों के बीच की दूरी को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
होम स्टे में बिताई रात, टेलिस्कोप से निहारा ब्रह्मांड इस विशेष ग्रामीण प्रवास कार्यक्रम के तहत नर्मदापुरम के कलेक्टर सोमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक (एसपी) साई कृष्णा एस. थोटा, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन और वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) गौरव शर्मा ने छेंडका गांव के स्थानीय ‘होम स्टे’ में रात्रि विश्राम किया। अधिकारियों का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक या वीआईपी दौरा नहीं था, बल्कि इसके जरिए गांव की मूल आत्मा और संस्कृति को महसूस करने का एक गंभीर प्रयास किया गया। रात होते ही गांव का खुला और प्रदूषण मुक्त आसमान एक प्राकृतिक वेधशाला में तब्दील हो गया, जहां सभी अधिकारियों ने आधुनिक टेलिस्कोप के माध्यम से चांद और तारों को करीब से निहारा और ग्रामीण अंचलों में ‘एस्ट्रो-टूरिज्म’ (खगोल पर्यटन) की संभावनाओं को समझा।
बैलगाड़ी की सवारी और गुल्ली-डंडा की गूंज सुबह की पहली किरण के साथ ही छेंडका गांव का दृश्य पूरी तरह बदल गया। अधिकारियों के काफिले में चलने वाले चमचमाते सरकारी वाहनों की जगह पारंपरिक बैलगाड़ी ने ले ली। गांव की कच्ची और धूलभरी पगडंडियों पर बैलगाड़ी में शान से बैठे कलेक्टर और एसपी को देखकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। इसके बाद अधिकारियों ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए गांव के बच्चों के साथ लोकप्रिय पारंपरिक खेल ‘गुल्ली-डंडा’ में भी जमकर हाथ आजमाया। बच्चों और बुजुर्गों के साथ अधिकारियों के ठहाकों और हंसी-खुशी के इन पलों ने पूरे प्रवास कार्यक्रम को यादगार और बेहद आकर्षक बना दिया।
स्थानीय व्यंजनों का स्वाद और आत्मनिर्भरता का संदेश प्रवास के दौरान सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरी तरह जमीन पर बैठकर पारंपरिक और स्थानीय ग्रामीण व्यंजनों का स्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से सीधा और सहज संवाद स्थापित कर उनकी रोजमर्रा की जीवनशैली, लोक परंपराओं तथा समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझा। इस प्रेरक अनुभव को साझा करते हुए कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण पर्यटन केवल मनोरंजन या घूमने-फिरने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे गांवों की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने का एक सशक्त जरिया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, हमारी पारंपरिक संस्कृति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी और गांव सही मायनों में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएंगे।









