Chhattisgarh Court News: रायपुर। देशभर में फर्जी वकीलों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच छत्तीसगढ़ की अदालतों में भी बड़ा खुलासा हुआ है। न्यायालय परिसरों में चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान के दौरान करीब 40 ऐसे लोगों की पहचान की गई, जो वैध अधिवक्ता पंजीयन के बिना कोर्ट परिसर में सक्रिय पाए गए। कार्रवाई के बाद इन सभी अनधिकृत व्यक्तियों को न्यायालय परिसर से बाहर कर दिया गया, जिससे कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया।
Chhattisgarh Court News:जानकारी के अनुसार, अदालतों में बढ़ती शिकायतों और फर्जी अधिवक्ताओं की आशंकाओं को देखते हुए बार काउंसिल और न्यायालय प्रशासन ने संयुक्त रूप से सत्यापन अभियान चलाया। इस दौरान अधिवक्ताओं के पहचान पत्र, पंजीयन दस्तावेज और अन्य आवश्यक अभिलेखों की जांच की गई। जांच में कई ऐसे लोग सामने आए जो खुद को वकील या अधिवक्ता सहयोगी बताकर न्यायालय परिसर में सक्रिय थे, लेकिन उनके पास वैध दस्तावेज नहीं मिले।
न्याय व्यवस्था की साख बचाने के लिए सख्ती
Chhattisgarh Court News:अधिकारियों का कहना है कि अदालतों में केवल पंजीकृत और अधिकृत अधिवक्ताओं को ही प्रैक्टिस करने का अधिकार है। ऐसे में बिना अनुमति या फर्जी पहचान के न्यायालय परिसर में गतिविधियां संचालित करना गंभीर मामला माना जाता है। इसी कारण निरीक्षण अभियान को आगे भी जारी रखने की तैयारी की जा रही है।
कोर्ट परिसरों में होगी नियमित जांच
Chhattisgarh Court News:सूत्रों के अनुसार, भविष्य में जिला एवं सत्र न्यायालयों में समय-समय पर पहचान सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। अधिवक्ताओं को बार काउंसिल पंजीयन और पहचान पत्र साथ रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
फर्जी वकीलों को लेकर देशभर में बढ़ी चिंता
Chhattisgarh Court News: हाल ही में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन द्वारा देश में बड़ी संख्या में फर्जी वकीलों की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद कई राज्यों में अधिवक्ताओं के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन अभियान तेज किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में हुई यह कार्रवाई भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।
आम लोगों को भी रहना होगा सतर्क
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मुकदमे या कानूनी प्रक्रिया के लिए अधिवक्ता नियुक्त करने से पहले उसके बार काउंसिल पंजीयन और पहचान की पुष्टि कर लेना जरूरी है। इससे फर्जी लोगों के झांसे में आने से बचा जा सकता है और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास कायम रहता है।









