Gharghoda Crime Update: रायगढ़ पुलिस के “ऑपरेशन तलाश” को बड़ी कामयाबी: 13 साल पुराने चोरी के मामले में फरार आरोपी चिंतामणि गिरफ्तार

Gharghoda Crime Update: गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अपराधियों और वारंटियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून के हाथ कितने भी लंबे हो सकते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह के विशेष दिशा-निर्देशन में चलाए जा रहे जिला स्तरीय अभियान “ऑपरेशन तलाश” के तहत घरघोड़ा थाना पुलिस को एक अभूतपूर्व सफलता मिली है। पुलिस टीम ने पिछले 13 वर्षों (साल 2013) से लगातार फरार चल रहे एक शातिर आरोपी चिंता उर्फ चिंतामणि राठिया को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी एक पोल्ट्री फार्म में हुई बड़ी चोरी के बाद से अपनी पहचान छुपाकर पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था।

पिकअप वाहन लेकर पहुंचे थे 8-10 चोर; उड़ा ले गए थे 9000 अंडे और 300 मुर्गे

यह पूरा मामला आज से करीब 13 साल पहले यानी 9 अक्टूबर 2013 की रात का है। घरघोड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भेंगारी में स्थित एक बड़े पोल्ट्री फार्म में आधी रात को एक पिकअप वाहन (क्रमांक सीजी-13-एल-3356) का चालक अपने 7 से 8 अन्य साथियों के साथ धावा बोल दिया था। इन नकाबपोश चोरों ने फार्म के भीतर से 300 नग जीवित मुर्गे, 150 नग प्लास्टिक अंडा ट्रे और करीब 9,000 नग जीवित अंडे समेटे और पिकअप में लादकर रफूचक्कर हो गए थे। उस वक्त चोरी की गई कुल सामग्रियों की कीमत लगभग ₹60,000 आंकी गई थी। पोल्ट्री फार्म संचालक की लिखित शिकायत पर थाना घरघोड़ा में तत्कालीन समय पर अपराध क्रमांक 378/2013 के तहत भादवि की धारा 457, 380, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई थी।

बिहार के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से फरार था चिंतामणि

वारदात के ठीक चार दिन बाद यानी 13 अक्टूबर 2013 को तत्कालीन पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मुख्य आरोपी शैलेश कुमार महतो (निवासी छपरा, बिहार; हाल मुकाम रक्सापाली, भूपदेवपुर) को धरदबोचा था। पुलिस ने शैलेश के कब्जे से चोरी में इस्तेमाल की गई पिकअप गाड़ी और ₹2500 नगद किराया रकम भी जब्त की थी।

जब पुलिस ने शैलेश को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने इस पूरी वारदात में स्थानीय कड़ियों का खुलासा किया था। शैलेश ने बताया था कि भेंगारी पोल्ट्री फार्म की रेकी करने और मुर्गों व अंडों को गाड़ी में लोड करवाने में छाल क्षेत्र के बरभौना का रहने वाला चिंता उर्फ चिंतामणि राठिया भी मुख्य रूप से शामिल था। इस खुलासे के बाद जैसे ही पुलिस चिंतामणि के घर पहुंची, वह गांव छोड़कर फरार हो गया और तब से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।

“ऑपरेशन तलाश” में मुखबिर की सूचना पर छाल में पड़ी दबिश

वर्तमान में रायगढ़ के कप्तान एसएसपी शशि मोहन सिंह के कड़े रुख के बाद जिले के सभी थानों में पुराने, लंबित और फरार स्थाई वारंटियों की फाइलों को दोबारा खोला गया है। घरघोड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव लगातार अपनी खुफिया टीम को सक्रिय किए हुए थे। इसी बीच 22 मई 2026 को पुलिस को एक पुख्ता मुखबिर से सूचना मिली कि 13 साल से फरार चल रहा चिंतामणि राठिया अपनी फरारी काट कर छाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अपने गृह ग्राम बरभौना में चुपके से आया हुआ है।

सूचना को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए थाना प्रभारी ने बिना वक्त गंवाए एएसआई नरेन्द्र सिदार और प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक के नेतृत्व में एक विशेष सशस्त्र बल की टीम तैयार की। पुलिस टीम ने देर रात ही बरभौना गांव को चारों तरफ से घेर लिया और अलसुबह आरोपी के घर पर औचक दबिश देकर चिंता उर्फ चिंतामणि राठिया (पिता पीलाराम राठिया, उम्र 30 साल) को उसकी खाट से उठाकर हिरासत में ले लिया।

आरोपी ने स्वीकार किया जुर्म; एसएसपी ने कहा— कानून से बचना नामुमकिन

थाने लाकर जब साइबर और घरघोड़ा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने चिंतामणि से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने साल 2013 में भेंगारी पोल्ट्री फार्म में अपने साथियों के साथ मिलकर की गई चोरी की उस खौफनाक रात की पूरी कहानी बयां कर दी और अपना जुर्म कबूल कर लिया। पर्याप्त भौतिक और तकनीकी साक्ष्य पाए जाने पर पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर रायगढ़ न्यायालय में पेश किया, जहां से माननीय कोर्ट ने उसे जेल (न्यायिक रिमांड) भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं।

इस बड़ी और ऐतिहासिक गिरफ्तारी पर रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह ने पूरी टीम को बधाई देते हुए क्षेत्र के अपराधियों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। कप्तान ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि “जिले में ‘ऑपरेशन तलाश’ पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। फरार आरोपियों, वारंटियों और समाज में अशांति फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस का यह हंटर रुकने वाला नहीं है। अपराधी यह अच्छी तरह समझ लें कि वे चाहे पाताल में भी छुप जाएं या कितने भी साल बीत जाएं, वे कानून और पुलिस की नजरों से ज्यादा समय तक बच नहीं सकते। उनका अंतिम ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल की सलाखें ही होंगी।” पुलिस ने बताया कि इस केस से जुड़े कुछ अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

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