Biodiversity Day Bhopal:भोपाल। प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (IIFM) में शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शिरकत की और जैव विविधता संरक्षण को लेकर प्रदेश तथा देश में किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की।
Biodiversity Day Bhopal:कार्यक्रम की शुरुआत वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने संयुक्त रूप से 20 नई मोटरसाइकिलों और एक अत्याधुनिक रेस्क्यू ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों का उपयोग वन क्षेत्रों में गश्त, वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा।
मध्यप्रदेश बन रहा है ‘चीता स्टेट’
Biodiversity Day Bhopal:कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में चल रहे वन्यजीव संरक्षण अभियानों और कूनो राष्ट्रीय उद्यान में संचालित चीता परियोजना पर विशेष प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में बताया गया कि मध्यप्रदेश पहले ही देश में टाइगर स्टेट के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है और अब राज्य को चीता स्टेट के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
Biodiversity Day Bhopal:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 में शुरू की गई प्रोजेक्ट चीता योजना आज सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं और कुछ चीतों की मृत्यु भी हुई, लेकिन विशेषज्ञों के प्रयासों और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण परियोजना अब सकारात्मक परिणाम दे रही है।
Biodiversity Day Bhopal:उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा लग रहा था कि चीता संरक्षण बड़ी चुनौती बन जाएगा, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण बन रहा है।
वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की सराहना
Biodiversity Day Bhopal:केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश सरकार जैव विविधता संरक्षण, वन विस्तार और वन्यजीवों की सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब वह प्रकृति और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाकर किया जाए।
Biodiversity Day Bhopal:उन्होंने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सदियों से प्रकृति और जीव-जंतुओं को पूजनीय माना जाता रहा है। यही कारण है कि यहां वन्यजीव संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका और विकास पर जोर
Biodiversity Day Bhopal:केंद्रीय मंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार और आजीविका से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सके।
हाथी, बफेलो, घड़ियाल और गिद्ध संरक्षण की दिशा में प्रयास
Biodiversity Day Bhopal:मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार केवल चीता संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। असम के सहयोग से प्रदेश में हाथी और जंगली भैंस (बफेलो) लाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा घड़ियाल, गिद्ध, तेंदुआ, दुर्लभ कछुआ प्रजातियों सहित कई वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
Biodiversity Day Bhopal:उन्होंने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल पर्यावरण संतुलन के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक विरासत सौंपने के लिए भी जरूरी है।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल
Biodiversity Day Bhopal:मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को लेकर भी राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को सामाजिक अभियान का रूप दिया गया है और इसे विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजनों से जोड़ा गया है। साथ ही प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नदी जोड़ो अभियान पर भी तेजी से काम कर रही है, जिससे भविष्य में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
Biodiversity Day Bhopal:कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जैव विविधता केवल वन्यजीवों और पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव जीवन, जल, भोजन और जलवायु संतुलन का आधार है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।









