Friday, August 21, 2026
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Gariaband Leopard Attack: 7 साल के मासूम पर किया जानलेवा हमला; गर्दन दबोचकर ले जा रहा था जंगल, परिजनों ने साहस दिखाकर छुड़ाया

Gariaband Leopard Attack: गरियाबंद। जिला मुख्यालय गरियाबंद के करीबी ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर खूंखार तेंदुए की दहशत का खौफनाक मंजर देखने को मिला है। गरियाबंद वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोदोबतर के चट्टानपारा इलाके में गुरुवार की रात एक तेंदुए ने 7 वर्षीय मासूम बच्चे पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया। तेंदुआ बच्चे की गर्दन को अपने जबड़े में दबोचकर घने जंगल की तरफ ले जा रहा था। इसके विपरीत, बच्चे की चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और लाठी-डंडों की मदद से तेंदुए से सीधे भिड़ गए। परिजनों के भारी विरोध के बाद तेंदुआ बच्चे को छोड़कर जंगल की तरफ भाग निकला। इस हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है।

टीवी देखकर घर लौट रहा था मासूम धनेश

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चट्टानपारा निवासी धनेश कुमार (7 वर्ष) गुरुवार की रात करीब आठ-नौ बजे के आसपास पड़ोस के एक घर में टीवी देखने गया था। टीवी देखने के बाद जब वह अकेले पैदल अपने घर वापस लौट रहा था, तभी रास्ते में घात लगाकर बैठे एक भूखे तेंदुए ने उस पर पीछे से झपट्टा मार दिया। तेंदुए ने सीधे बच्चे की गर्दन पर हमला किया और उसे दबोचकर घसीटते हुए जंगल की ओर ले जाने की कोशिश करने लगा। इस अचानक हुए हमले से सहमे मासूम ने पूरी ताकत से चिल्लाना शुरू कर दिया।

मौत के मुंह से खींच लाए परिजन

बच्चे की रोने और चिल्लाने की आवाज जैसे ही उसके माता-पिता और आसपास के परिजनों के कानों तक पहुंची, वे बिना अपनी जान की परवाह किए बिना लाठी-डंडे लेकर तुरंत आवाज की दिशा में दौड़े। अंधेरे में तेंदुए को बच्चे को ले जाते देख परिजनों ने शोर मचाया और तेंदुए पर डंडों से हमला कर दिया। ग्रामीणों और परिजनों के इस आक्रामक रुख को देखकर तेंदुआ घबरा गया और मासूम धनेश को मौके पर ही छोड़कर घने जंगल के भीतर ओझल हो गया।

हालत गंभीर, जिला अस्पताल से रायपुर किया गया रेफर

तेंदुए के इस खूनी हमले में मासूम धनेश के शरीर और गर्दन पर दांत व नाखूनों के बेहद गहरे और गंभीर चोट के निशान आए हैं। खून से लथपथ हालत में परिजन उसे तत्काल गरियाबंद जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल के डॉक्टरों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चे का प्राथमिक उपचार किया और बहते खून को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, गर्दन की चोट बेहद संवेदनशील होने और बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल बेहतर और उच्च स्तरीय इलाज के लिए मेकाहारा अस्पताल रायपुर रेफर कर दिया है, जहां उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

गर्मी के दिनों में आबादी की तरफ आ रहे वन्यजीव

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद से पूरे कोदोबतर और चट्टानपारा इलाके के ग्रामीणों में भारी दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के दिनों में जंगलों के भीतर पानी के स्रोत सूख जाते हैं। पानी और शिकार की तलाश में अक्सर वन्यजीव और तेंदुए जंगल से निकलकर मुख्य आबादी वाले रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। गरियाबंद जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की परिधि में हर साल तेंदुओं की ऐसी आमदरफ्त देखी जाती है, जिससे लगातार जनहानि की आशंका बनी रहती है।

रेंजर प्रांजली मिश्रा ने संभाली कमान, लगाए गए ट्रैप कैमरे

घटना की अधिकारिक सूचना मिलते ही वन विभाग की एक विशेष रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। वन विभाग के अमले ने ग्रामीणों को सुरक्षा के प्रति सचेत करने के लिए पूरे गांव में मुनादी (लाउडस्पीकर से घोषणा) कराई है, जिसमें लोगों को रात के समय अकेले घरों से बाहर न निकलने और बच्चों को सुरक्षित रखने की सलाह दी जा रही है।

इस संबंध में गरियाबंद रेंजर प्रांजली मिश्रा ने बताया कि तेंदुए के हमले की घटना बेहद दुखद है। वन विभाग की टीम तेंदुए की सटीक लोकेशन को ट्रैक करने का लगातार प्रयास कर रही है। उसकी गतिविधियों और मूवमेंट पर नजर रखने के लिए घटना स्थल के आसपास के जंगलों और रास्तों पर आधुनिक ट्रैप कैमरे इंस्टॉल कर दिए गए हैं। इसके अलावा पीड़ित परिवार को शासन के नियमानुसार उचित मुआवजा और सहायता राशि दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

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