Raigarh Balwa Drill Practice: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। जिले की कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और आपातकालीन परिस्थितियों में उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रायगढ़ पुलिस द्वारा एक बड़ा अभ्यास किया गया है। जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में प्रति शुक्रवार आयोजित होने वाली जनरल परेड के दौरान आज 22 मई 2026 को पुलिसकर्मियों द्वारा ‘बलवा ड्रिल’ का विशेष अभ्यास किया गया। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से किसी भी अप्रिय स्थिति या दंगे जैसी परिस्थितियों में पुलिस बल की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, आपसी तालमेल और रणनीतिक तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया गया।
उत्कृष्ट टर्न आउट वाले पुलिसकर्मी हुए पुरस्कृत
शुक्रवार सुबह चेकिंग अभियान और परेड के तहत सबसे पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह ने जनरल परेड की विधिवत सलामी ली। इसके बाद उन्होंने परेड ग्राउंड में मौजूद सभी जवानों और अधिकारियों के टर्न आउट का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान जिन पुलिसकर्मियों की वर्दी, जूते और टर्न आउट सबसे साफ-सुथरे और उत्कृष्ट पाए गए, उन्हें एसएसपी द्वारा मौके पर ही नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया ताकि बल में अनुशासन की भावना और मजबूत हो सके।
रक्षित निरीक्षक ने बनाईं अलग-अलग विशेष पार्टियां
सलामी और निरीक्षण के ठीक बाद मुख्य बलवा नियंत्रण अभ्यास की शुरुआत की गई। इसके लिए रक्षित निरीक्षक (आरबाई) अमित सिंह द्वारा पुलिस मैन्युअल के अनुसार अलग-अलग विशेष पार्टियों का गठन किया गया था। इस रणनीतिक डेमो के सुचारू संचालन के लिए पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट, अश्रुगैस (टियर गैस) पार्टी, लाठीचार्ज पार्टी, फायर ब्रिगेड पार्टी, मेडिकल लाइफ सपोर्ट टीम और इंटेलिजेंस विंग के अलग-अलग डेमो अधिकारी नियुक्त किए गए थे ताकि वास्तविक फील्ड जैसा माहौल तैयार किया जा सके।
अश्रुगैस के इस्तेमाल के साथ उग्र भीड़ का व्यावहारिक प्रदर्शन
इस बलवा ड्रिल की सबसे खास बात यह रही कि पुलिस की ही एक टुकड़ी को प्रदर्शनकारियों और बलवाइयों की भूमिका सौंपी गई थी। इस व्यावहारिक प्रदर्शन के दौरान बलवाई बने पुलिसकर्मियों को कपड़े से बनी विशेष गेंदें दी गईं, जिन्हें वे सुरक्षा में तैनात पुलिस बल की ओर लगातार फेंककर पथराव का माहौल बना रहे थे। तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित करने, उग्र भीड़ को पीछे धकेलने और न्यूनतम बल प्रयोग के सिद्धांतों का पालन करते हुए पुलिस द्वारा भीड़ नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन किया गया। इस दौरान माहौल को वास्तविक रूप देने के लिए असली अश्रुगैस के गोलों का भी उपयोग किया गया।
सड़क हादसे के बाद मुआवजे के विवाद पर हुआ डेमो
अभ्यास के लिए पुलिस ने एक बेहद व्यावहारिक विषय चुना था। इसके तहत सड़क दुर्घटना के बाद मृतक के परिजनों और ग्रामीणों द्वारा मुआवजे की मांग को लेकर चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन की स्थिति का एक जीवंत डेमो प्रस्तुत किया गया। इसमें दिखाया गया कि जब बातचीत के बाद भी भीड़ अचानक उग्र और हिंसक होने लगे, तो पुलिस को किस तरह संयमित रहते हुए लाठीचार्ज, पानी की बौछार या अश्रुगैस का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि शांति व्यवस्था भी बहाल हो जाए और किसी नागरिक को गंभीर चोट भी न आए।
एसएसपी ने खुद लिया जायजा, कमियों को सुधारने के निर्देश
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह स्वयं सुरक्षा गियर पहनकर इस बलवा ड्रिल में शामिल हुए। उन्होंने प्रत्येक पार्टी की गतिविधियों का बेहद बारीकी से अवलोकन किया। अभ्यास खत्म होने के बाद उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि फील्ड में ड्यूटी के दौरान परिस्थितियां अचानक बदल सकती हैं, इसलिए पुलिस बल को हर समय मानसिक और शारीरिक रूप से सतर्क रहना होगा। उन्होंने ड्रिल के दौरान सामने आईं छोटी-मोटी तकनीकी कमियों को तत्काल सुधारने के निर्देश दिए और जवानों को हर परिस्थिति में धैर्य, अनुशासन और रणनीतिक तरीके से कार्य करने की सीख दी।
जिले के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सुरक्षा अभ्यास के दौरान जिले के कई राजपत्रित अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। बलवा ड्रिल में सीएसपी मयंक मिश्रा, डीएसपी (मुख्यालय) उन्नति ठाकुर, प्रशिक्षु डीएसपी अजय नागवंशी, रक्षित निरीक्षक अमित सिंह सहित थाना प्रभारी पुसौर हर्षवर्धन सिंह बैस, थाना प्रभारी जूटमिल रोहित बंजारे और अजाक, महिला थाना व रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) के भारी संख्या में पुलिस बल के जवान और अधिकारी पूरी तैयारी के साथ शामिल हुए।









