बिलासपुर (प्रतीक चौहान) [Nishanebaaz News]। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कृषि शिक्षक (Agriculture Teacher) के पदों पर भर्ती के लिए B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की अनिवार्यता से जुड़े मामले में अभ्यर्थियों को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने 65 अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका को प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की थी कि वर्तमान में B.Ed की डिग्री न होने के बावजूद उन्हें कृषि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाए। साथ ही उन्होंने चयन होने की स्थिति में निर्धारित समय के भीतर B.Ed पूरा करने का ‘संक्रमणकालीन अवसर’ (One-time Relaxation) देने की गुहार लगाई थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क: 2019 के नियमों में नहीं थी B.Ed की शर्त
याचिका में अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि वर्ष 2019 की पात्रता व्यवस्था के तहत कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed अनिवार्य नहीं था। हालांकि, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 5 फरवरी 2025 के फैसले के बाद राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 को राजपत्र जारी कर B.Ed को अनिवार्य योग्यता बना दिया।
अभ्यर्थियों ने तर्क दिया कि नई योग्यता लागू होने के बाद उन्हें B.Ed हासिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। 28 जुलाई 2026 को भर्ती का संक्षिप्त विज्ञापन जारी किया गया, जिसकी आवेदन की अंतिम तिथि 2 सितंबर 2026 तय है। चूंकि B.Ed का कोर्स दो शैक्षणिक वर्षों का होता है, इसलिए इतने कम समय में यह डिग्री हासिल करना संभव नहीं था।
राज्य सरकार और व्यास बोर्ड का विरोध
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन बोर्ड (CG Vyapam) ने याचिका का कड़ा विरोध किया। राज्य के वकीलों ने तर्क दिया कि निर्धारित अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता में न्यायालय के माध्यम से छूट नहीं दी जा सकती।
राज्य सरकार ने पूर्व में आए डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed की पुरानी छूट को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर (Ultra Vires) घोषित किया जा चुका है।
कोर्ट का फैसला: “न्यूनतम योग्यता में नहीं दे सकते न्यायिक छूट”
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य पात्रता मानदंड और सेवा नियम तय करना पूरी तरह से राज्य सरकार और नियम बनाने वाले प्राधिकार (NCTE) के अधिकार क्षेत्र में आता है।
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असंवैधानिक छूट का हवाला: हाईकोर्ट ने कहा कि जब 2019 के नियमों में दी गई B.Ed संबंधी छूट को पूर्व में ही असंवैधानिक घोषित कर एनसीटीई (NCTE) के 2014 के नियमों के अनुसार B.Ed अनिवार्य करने का निर्देश दिया जा चुका है, तब अभ्यर्थियों को बिना B.Ed के परीक्षा में बैठने की छूट नहीं दी जा सकती।
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न्यायिक हस्तक्षेप से इंकार: अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय अनिवार्य योग्यता में छूट देकर कोई अलग व्यवस्था लागू नहीं कर सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सभी 65 याचिकाओं को खारिज कर दिया।





