Friday, August 21, 2026
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MP News: ट्विशा शर्मा केस अब CBI के हवाले! सास को जमानत, पति गायब… आखिर किस दिशा में जा रही जांच?

Twisha Sharma CBI Investigation : भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा CBI जांच मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने ट्विशा शर्मा की मौत की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है।12 मई 2026 को कटारा हिल्स स्थित घर में हुई ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद से लगातार सवाल उठ रहे थे। परिवार पहले दिन से ही पुलिस जांच पर सवाल खड़ा कर रहा था और अब आखिरकार मामला CBI तक पहुंच गया है।

ट्विशा शर्मा CBI जांच की मांग सबसे पहले परिवार की ओर से की गई थी। ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने आरोप लगाया था कि पुलिस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही और प्रभावशाली लोगों के दबाव में जांच प्रभावित हो रही है।परिवार का दावा है कि कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। उनका कहना है कि अगर समय रहते गंभीरता दिखाई जाती, तो शायद जांच की दिशा अलग होती।

आरोपी पति अब भी फरार, पुलिस पर सवाल
इस पूरे ट्विशा शर्मा CBI जांच मामले में सबसे बड़ा सवाल आरोपी पति समर्थ सिंह की गिरफ्तारी को लेकर उठ रहा है। घटना के कई दिन बाद भी वह पुलिस की पकड़ से बाहर है।भोपाल पुलिस ने समर्थ पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है। बावजूद इसके आरोपी का फरार रहना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आरोपी हाई कोर्ट तक अग्रिम जमानत के लिए पहुंच सकता है, तो पुलिस उसे ट्रैक करने में क्यों नाकाम रही?

रिटायर्ड जज सास की भूमिका पर भी चर्चा
ट्विशा शर्मा CBI जांच में ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है। उन्हें जमानत मिल चुकी है, लेकिन परिवार का आरोप है कि उनसे अब तक औपचारिक पूछताछ तक नहीं हुई।परिजनों का कहना है कि घटना जिस घर में हुई, उसी घर में उनका रहना साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को बढ़ाता है।अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रभावशाली पदों और पहचान का असर जांच प्रक्रिया पर पड़ रहा था?
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फॉरेंसिक जांच में देरी ने बढ़ाई शंका
इस पूरे ट्विशा शर्मा CBI जांच मामले में फॉरेंसिक प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। परिवार का आरोप है कि कथित तौर पर इस्तेमाल हुई बेल्ट को घटना के दो दिन बाद जांच के लिए भेजा गया।इसके अलावा कोर्ट द्वारा शव को विशेष तापमान में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन परिवार का दावा है कि उस स्तर की व्यवस्था समय पर नहीं हो सकी।फॉरेंसिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में शुरुआती घंटे सबसे अहम होते हैं। अगर सबूतों के संरक्षण में देरी हो, तो जांच प्रभावित हो सकती है।

महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस
ट्विशा शर्मा CBI जांच अब केवल एक आपराधिक केस नहीं रह गया है। इस मामले ने महिला सुरक्षा, पुलिस की निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है।सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्यों कई हाई-प्रोफाइल मामलों में शुरुआती जांच पर अविश्वास दिखाई देता है।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीड़ित परिवार को स्थानीय जांच एजेंसियों पर भरोसा न रहे और उन्हें CBI जांच की मांग करनी पड़े, तो यह सिस्टम के लिए चिंता का विषय है।

अब CBI जांच से क्या बदल सकता है?
अब पूरे मामले में नजरें CBI की कार्रवाई पर टिक गई हैं। ट्विशा शर्मा CBI जांच के जरिए यह उम्मीद की जा रही है कि केस से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।हालांकि इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश में महिला उत्पीड़न और संदिग्ध मौतों के मामलों में स्थानीय स्तर पर जांच एजेंसियों को और ज्यादा जवाबदेह बनाने की जरूरत है?

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