‘मुझे बचा लो’… दहेज, टॉर्चर और मौत, बेटियों की आखिरी पुकार क्यों नहीं सुन पा रहा समाज? कहां चूक रहा सिस्टम?

देशभर में बढ़ते दहेज और घरेलू हिंसा मामले एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। हाल के दिनों में भोपाल, ग्रेटर नोएडा और अमरोहा से सामने आए कई मामलों ने समाज और पारिवारिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।इन मामलों में एक समान बात यह सामने आई कि पीड़ित महिलाओं ने अपनी मौत से पहले परिवार या करीबी लोगों से मदद मांगी थी। किसी ने फोन कॉल किया तो किसी ने मैसेज भेजकर अपनी तकलीफ बताने की कोशिश की।

भोपाल की रहने वाली द्विशा शर्मा का मामला इन दिनों काफी चर्चा में है। दहेज और घरेलू हिंसा मामले के बीच सामने आए आरोपों के अनुसार शादी के कुछ समय बाद ही उन्हें मानसिक प्रताड़ना और तनाव का सामना करना पड़ा।द्विशा कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करती थीं और अभिनय से भी जुड़ी हुई थीं। उनका परिवार सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित माना जाता है। 12 मई 2026 को उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया।

दीपिका नागर केस में दहेज मांग के आरोप
ग्रेटर नोएडा की दीपिका नागर का मामला भी दहेज और घरेलू हिंसा मामले को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ा रहा है। परिवार का आरोप है कि शादी में भारी खर्च और महंगे उपहार देने के बावजूद अतिरिक्त नकदी और लग्जरी वाहन की मांग की जा रही थी।17 मई को दीपिका की मौत की सूचना मिलने के बाद पूरे मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।

मोनिका नागर की मौत भी बनी रहस्य
ग्रेटर नोएडा की मोनिका नागर ने प्रेम विवाह किया था, लेकिन बाद में रिश्तों में तनाव बढ़ने के आरोप सामने आए। दहेज और घरेलू हिंसा मामले के बीच परिवार का दावा है कि मोनिका लगातार मानसिक दबाव में थीं।परिजनों के अनुसार उन्होंने कई बार मदद के लिए कॉल और मैसेज किए थे। कुछ समय बाद उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना मिली।
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अमरोहा की पुष्पेंद्री की आखिरी कॉल ने झकझोरा
अमरोहा की 19 वर्षीय नवविवाहिता पुष्पेंद्री का मामला भी लोगों को भावुक कर रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने मौत से कुछ घंटे पहले अपने पिता को रोते हुए फोन किया था।परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था। बाद में ससुराल में उनका शव फंदे से लटका मिला। यह मामला भी अब दहेज और घरेलू हिंसा मामले की बहस को और गंभीर बना रहा है।

NCRB आंकड़ों ने दिखाई गंभीर तस्वीर
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB के आंकड़े बताते हैं कि हर साल हजारों महिलाएं दहेज और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में अपनी जान गंवा देती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज और घरेलू हिंसा मामले के कई केस ऐसे भी होते हैं जो पुलिस रिकॉर्ड तक पहुंच ही नहीं पाते। सामाजिक दबाव और पारिवारिक प्रतिष्ठा के कारण कई महिलाएं खुलकर शिकायत नहीं कर पातीं।

समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल
इन सभी घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर मदद मांगने के बावजूद महिलाओं को समय रहते सुरक्षा क्यों नहीं मिल पाती।कई मामलों में पीड़ित महिलाओं ने अपने माता-पिता और दोस्तों को स्थिति के बारे में बताया था, लेकिन ‘समाज क्या कहेगा’ जैसी सोच के कारण अक्सर मामलों को टाल दिया गया। अब दहेज और घरेलू हिंसा मामले को लेकर सामाजिक जागरूकता और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।

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