MP Transfer Policy: भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने राज्य के शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ‘स्थानांतरण नीति-2026’ को हरी झंडी दे दी है। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट की अहम बैठक में नई ट्रांसफर पॉलिसी के ड्राफ्ट पर मुहर लग गई है। नई नीति के तहत प्रदेश में 1 जून से 15 जून 2026 तक केवल 15 दिनों के लिए तबादलों पर से प्रतिबंध हटा दिया गया है। लंबे समय से मनचाही पदस्थापना का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह बेहद राहत भरी खबर है। पिछले साल यह प्रक्रिया 30 दिनों तक चली थी, लेकिन इस बार सरकार पारदर्शिता और ऑनलाइन व्यवस्था पर विशेष जोर दे रही है।
तबादलों के लिए तय हुईं शर्तें, प्रभारी मंत्रियों को मिली कमान
कैबिनेट बैठक के बाद सामने आए नियमों के मुताबिक, इस बार प्रत्येक संवर्ग में अधिकतम 20 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों के ही तबादले किए जा सकेंगे, जिससे मनमाने ट्रांसफर पर रोक लगेगी। जिलों के भीतर होने वाले सभी तबादलों के लिए संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री का अनुमोदन (स्वीकृति) अनिवार्य किया गया है। नई नीति में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि जहां तक संभव हो, सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थापना मिल सके। इसके अतिरिक्त, कैंसर, किडनी खराबी और ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित कर्मचारियों को इस नीति में विशेष छूट व प्राथमिकता दी जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए इस बार भी अलग से ट्रांसफर पॉलिसी प्रभावी रहेगी।
साल 2027 में उज्जैन में जुटेगा दिग्गज नेताओं का जमावड़ा
कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की अगली (27वीं) बैठक वर्ष 2027 में धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित की जाएगी। हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर (जगदलपुर) में आयोजित 26वीं बैठक में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस पर अपनी सहमति दे दी है। उज्जैन में होने वाली इस बड़ी बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। बैठक के साथ-साथ गृह मंत्री अमित शाह ‘सिंहस्थ-2028’ के मद्देनजर उज्जैन में की जा रही मानव प्रबंधन, नागरिक व्यवस्थाओं और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जमीनी जायजा भी लेंगे।
लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा लाने का संकल्प
मोहन कैबिनेट ने धार भोजशाला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के आए ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश हमेशा से शांति का टापू रहा है और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अदालत के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हुए इसे शांतिपूर्वक लागू कराएगी। इसी के साथ सरकार ने एक और बड़ा सांस्कृतिक संकल्प लेते हुए कहा कि धार भोजशाला की अधिष्ठात्री मां वाग्देवी (सरस्वती) की लंदन में रखी वास्तविक प्रतिमा को वापस स्वदेश (मध्य प्रदेश) लाने के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार के साथ मिलकर हर संभव प्रयास और कूटनीतिक समन्वय स्थापित करेगी।









