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Sugar Export Ban : भारत ने रोकी चीनी सप्लाई, भारत में चीनी की खपत 277 लाख टन अनुमान, UAE, श्रीलंका, सोमालिया समेत कई देशों को झटका

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Sugar Export Ban : नई दिल्ली : भारत सरकार ने देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा। इस फैसले के तहत कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी तीनों के निर्यात पर रोक लगाई गई है। हालांकि कुछ विशेष श्रेणियों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है, जिनमें यूरोपीय संघ और अमेरिका को CXL और TRQ कोटे के तहत होने वाला निर्यात, एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत निर्यात और अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार-से-सरकार के समझौतों के तहत होने वाली सप्लाई शामिल है। इसके अलावा जो खेप पहले से निर्यात प्रक्रिया में हैं, उन्हें भी राहत दी गई है।

Sugar Export Ban : सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश में चीनी उत्पादन और खपत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है और ब्राजील के बाद वैश्विक बाजार में उसकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पिछले वर्षों में बेहतर उत्पादन के चलते भारत ने कई देशों को बड़े पैमाने पर चीनी निर्यात की थी, लेकिन अब गन्ना उत्पादन में गिरावट और घरेलू मांग बढ़ने की आशंका ने सरकार को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।

Sugar Export Ban : इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, 2025-26 सीजन में देश की चीनी खपत लगभग 277 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पहले के 283 लाख मीट्रिक टन के अनुमान से कम है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मौसम में असामान्य बदलावों का सीधा असर चीनी की मांग और कीमतों पर पड़ा है। अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक चीनी की मांग मजबूत बनी हुई थी, लेकिन पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद बाजार की स्थिति बदलने लगी।

Sugar Export Ban : विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर छोटे होटल, ढाबों और खाद्य कारोबारों पर पड़ा। इससे चीनी की खपत में गिरावट आई और बड़ी मात्रा में चीनी बिना बिके रह गई। उद्योग संगठनों के अनुसार कई राज्यों में मासिक कोटे की करीब 2 लाख मीट्रिक टन चीनी की बिक्री नहीं हो सकी। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले महीनों में भी मांग कमजोर रहने की संभावना है।

Sugar Export Ban : आपूर्ति की स्थिति पर नजर डालें तो अनुमान है कि 2025-26 सीजन में भारत का कुल चीनी उत्पादन करीब 320 लाख मीट्रिक टन रहेगा। इसमें से लगभग 34 लाख मीट्रिक टन चीनी को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ा जाएगा। सरकार लगातार एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है, जिससे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जा सके। इसका असर चीनी की उपलब्धता पर भी पड़ रहा है।

Sugar Export Ban : उद्योग जगत के सामने आर्थिक संकट भी लगातार बढ़ रहा है। गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर करीब 16 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 5 हजार करोड़ रुपए अधिक है। चीनी मिलों का कहना है कि गन्ने की ऊंची खरीद कीमत और चीनी की अपेक्षाकृत कम बिक्री कीमत के कारण वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने सरकार से चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली तो कई मिलों के लिए संचालन मुश्किल हो सकता है।

Sugar Export Ban : भारत की चीनी उद्योग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा क्षेत्र है। कपास के बाद चीनी उद्योग देश का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग माना जाता है। देशभर में लगभग 55 से 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है और करीब 5 करोड़ किसान परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के सबसे बड़े गन्ना और चीनी उत्पादक राज्य हैं।

Sugar Export Ban : भारत से हर साल कई देशों को चीनी निर्यात की जाती है। 2024-25 मार्केटिंग सीजन में भारत ने लगभग 7.75 लाख टन चीनी का निर्यात किया था। इसमें 6.13 लाख टन सफेद चीनी, 1.04 लाख टन रिफाइंड चीनी और 0.33 लाख टन कच्ची चीनी शामिल थी। भारत से सबसे ज्यादा चीनी खरीदने वाले देशों में जिबूती, सोमालिया, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल रहे। जिबूती ने सबसे अधिक 1.46 लाख टन चीनी खरीदी, जबकि सोमालिया ने 1.35 लाख टन और श्रीलंका ने 1.34 लाख टन चीनी का आयात किया। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, सूडान, तंजानिया और भूटान भी भारतीय चीनी के बड़े खरीदार रहे हैं।

Sugar Export Ban : विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा निर्यात पर रोक लगाने का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। इससे ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों को फायदा मिल सकता है, क्योंकि वे एशियाई और अफ्रीकी देशों को ज्यादा मात्रा में चीनी निर्यात कर पाएंगे। वहीं भारत के इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर रहने और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Sugar Export Ban : सरकार का मानना है कि घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना प्राथमिकता है। त्योहारों और गर्मियों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ जाती है, ऐसे में यदि निर्यात जारी रहता तो घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती थीं। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने समय रहते यह कदम उठाया है। आने वाले महीनों में उत्पादन, खपत और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।

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