garmi-risk-premature-delivery: भीषण गर्मी अब सिर्फ आम लोगों के लिए परेशानी नहीं रही, बल्कि गर्भवती महिलाओं और अजन्मे शिशुओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा तापमान प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताओं को तेजी से बढ़ा रहा है, जिससे डॉक्टरों की चिंता भी बढ़ गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस अत्यधिक गर्मी के कारण प्री-मैच्योर डिलीवरी (समय से पहले प्रसव) के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
garmi-risk-premature-delivery: शरीर में पानी की कमी और हीट स्ट्रेस के कारण गर्भाशय में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे डिलीवरी समय से पहले शुरू हो सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी का असर केवल मां पर ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ रहा है। प्लेसेंटा तक पोषण सही तरीके से न पहुंचने के कारण ‘लो बर्थ वेट’ यानी कम वजन वाले बच्चों के जन्म के मामले बढ़ रहे हैं।
garmi-risk-premature-delivery: इसके साथ ही लंबे समय तक धूप में रहने से गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर और प्री-एक्लेम्पसिया जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि गर्भवती महिलाएं दोपहर 11 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर
खुद को हाइड्रेटेड रखें।









